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भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी  के तौर पर मनाया जाता हैं। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, इसलिए चारों ओर खुशियाँ मनाई जाती हैं। इस दिन देश के सभी कृष्ण मंदिरों में पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण किया जाता हैं। देश में मथुरा-वृंदावन के अलावा एक मंदिर ऐसा है जहां जन्माष्टमी के दिन आधी रात को भगवान कृष्ण दर्शन देते हैं।ये हैं द्वारिकाधीश मन्दिर ।

कृष्ण जन्माष्टमी में  चरणामृत का विशेष महत्व हैं। इस दिन चरणामृत  किस तरह बनाया जाता हैं। वही बताने जा रहे हैं।सामग्री : - 500 ग्राम ताजा दूध- 100 ग्राम चीनी (पाउडर),- 10 ग्राम चिरौंजी,- 20 ग्राम मखाने (छोटे टुकड़ों में),- 4-5 तुलसा जी के पत्ते,- 1 छोटा चम्मच शहद,- 2 छोटा चम्मच गंगाजल,- 1 छोटा चम्मच देसी घी (पिघला हुआ),- 150 ग्राम दही, 

रामायण व महाभारत दो महाग्रंथ है जो हमें जीवन जीने की कला सीखाते हैं। गीता का उपदेश श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में ही दिया था और इसी जगह महाभारत का युद्ध भी हुआ था। इस युद्ध से  जुड़े कई रहस्य हैं, जिनके बारे में बहुत कम ही लोगों को पता है।

आसपास की ऊर्जा का हमारे काम और जीवन पर सीधा असर पड़ता है। अगर यह ऊर्जा सकारात्मक है तो हम सकारात्मक और खुश रहेंगे, लेकिन नकारात्मक ऊर्जा हमारे मन-मस्तिष्क पर ऐसा असर डालती है कि हम कुछ ऐसा कर बैठते हैं कि जिसका परिणाम भयावह होता है।

रुद्र संहिता में शिव-पार्वती के विवाह कथा का वर्णन है साथ ही उसमें यह भी बताया गयै है कि पतिव्रता पत्नी को वैवाहिक नियमों का पालन जीवनपर्यंत करना चाहिए । इन नियमों का पालन खुद माता पार्वती ने भी किया थाय़ उन्हें ये नियम एक पतिव्रता ब्राह्मण पत्नी ने विदाई के समय मां पार्वती को बताया था।

अक्सर घरों में खाना बनाते समय बच गए तेल को दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। इन कुकिंग तेलों का इस्तेमाल केवल घरों में  नहीं रेस्टोरेंट व होटलों में भी इस्तेमाल होता है जो हेल्थ के लिए नुकसानदायक है। लेकिन जो लोगो समझदार होते है वो बचे तेल को फेंक देते है लेकिन दोबारा इस्तेमाल नहीं करतें।

आपको बताना चाहते हैं कि इन बुरी आदतों का भी हमारे भाग्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यदि हम अपनी आदतों में कुछ बदलाव करें तो ना केवल घर आंगन में सकारात्मक  शक्तियों का प्रभाव बढ़ा सकते हैं, बल्कि नवग्रहों को भी शांत कर सकते हैं।

भाई-बहन के पवित्र बंधन का पर्व रक्षा बंधन 15 अगस्त को है। इस पर्व का बहनों को खासतौर पर इंतजार रहता है। राखी सावन के पूर्णिमा को होती है। लेकिन बहने इसका इंतजार हर साल बेसब्री से करती है। इस दिन बहने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती है

माह – श्रावण, तिथि – अष्टमी , पक्ष – शुक्ल, वार – गुरूवार, नक्षत्र – विशाखा ,  सूर्योदय – 05:46, सूर्यास्त – 19:07। बृहस्पतिवार को बच्चों के साथ वक्त गुजारेंगे। आध्यात्मिक तौर पर ज्यादातर  लोग जुड़ेंगे। परिवार में मांगलिक काम होगा।

सावन का हर दिन महत्वपूर्ण व भगवान शिव को समर्पित है। इसमें किया गया हर सात्विक काम पुण्य दिलाता है। वैसे तो हर दिन इस माह के सौभाग्यवर्धक है। लेकिन बृहस्पतिवार ज्यादा ही महत्वपूर्ण मानते हैं। इस दिन किए गए काम उम्र बढ़ाने के साथ उम्र घटाने का भी काम करते हैं।