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नागरिकता संशोधन कानून (CAA ) को लेकर असम समेत देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी है। इसी बीच एक महिला टीचर को विरोध प्रदर्शन का समर्थन करना भारी पड़ गया।

बुधवार को डीएम अरुण कुमार टीचर की भूमिका में नजर आए। उनके हाथों में पेन की जगह चाक थी और वो ब्लैक बोर्ड पर बच्चों को पढ़ाते रहे। दरअसल ये मौका था मुख्यालय स्थित गौरीगंज कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के औचक निरीक्षण का।

एक प्राइमरी स्कूल की टीचर ने ऐसी हरकत की जिसकी वजह से उसकी नौकरी चली गई, लेकिन अब उसे हर्जाने के तौर पर 6.4 करोड़ रुपए मिले हैं। टीचर ने 2 लड़कों के साथ संबंध बनाए जिसकी वजह से उसे नौकरी से निकाल दिया गया। यह मामला ब्रिटेन के पोर्ट टालबोट का है।

बीकेटी स्थित जीसीआरजी कॉलेज के छात्र ने शिक्षकों व कर्मचारियों पर देर से पहुंचने के कारण कमरे में बंद कर पीटने का आरोप लगाया है। पुलिस ने पीडि़त की तहरीर पर एफआइआर दर्ज की है।

राज्य सरकार के इस फैसले को एक्सपर्ट्स ने अपरिपक्व और बचकाना बताया है। बाद में शिक्षा मंत्री गोविंद दोटासरा ने यह भी कहा कि यह फैसला तभी लागू किया जाएगा, जब हमारे पास पर्याप्त संख्या में महिला शिक्षक होंगी।

दरअसल, कारण यह भी बताया जा रहा है कि मुख्यालय से काफी दूर होने के कारण कोई भी शिक्षक यहां आना ही नहीं चाहता, जिसका प्रभाव यह है कि लगभग पौने दो सौ की छात्रों को पढ़ाने के लिए महज तीन ही शिक्षक ही विद्यालय में उपस्थित होते हैं।

सभी को बचपन से सिखाया जाता है कि उनकी लाइफ में उनका टीचर ही उनका सब कुछ है। जिसकी जगह भगवान से भी उपर होती है लेकिन हम आपको एक ऐसी बात बताने जा रहें हैं जिसके बाद आप सबका टीचर के प्रति नजरिया ही बदल जाएगा। ये बात है इंग्लैंड की जहां एक महिला टीचर को घिनौनी हरकत की वजह से 2 साल की सजा सुनाई गयी है।

बाराबंकी में दरियाबाद क्षेत्र के शिक्षक आशुतोष आनंद अवस्थी को शिक्षा क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कामों के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने बच्चों के शैक्षिक स्तर के साथ ही उनका बौद्धिक और सामाजिक स्तर सुधारने का प्रयास किया। इसमें वे सफल भी रहे। यह सम्मान पांच सितबंर को उन्हें दिल्ली में आयोजित एक समारोह के दौरान राष्ट्रपति देंगे।

आशुतोष सिंह वाराणसी। वाराणसी को सर्व विद्या और सर्व ज्ञान की राजधानी यूं ही नहीं कहा जाता है। शहर का जितना धर्म और संस्कृति से गहरा नाता रहा है, उतना ही संस्कृत भाषा से भी है। एक वक्त था जब संस्कृत सीखने के लिए देश के कोने-कोने से छात्र वाराणसी आते थे। गंगा किनारे बने …