पर्यटन

वैसे तो सभ्य समाज में बेटा हो या बेटी कहा जाता है दोनों बराबर होते हैं, लेकिन प्रेग्नेंसी के वक्त हर कोई जानने को उत्सुक रहता है कि गर्भ में पल रहा शिशु का लिंग क्या है मेल या फीमेल। गर्भ में पल रहे बच्चे को लेकर हर किसी को क्यूरिसटी होती है  इसके लिए देश में कई तरह की परंपराएं प्रचलित है

सावन का पवित्र मास चल रहा है। इसमें अगर देवो के देव महादेव जो कि अजन्मे है, अनंत है।  उनके बारे में न जाने, न सुने तो सब बेकार है। इस एक माह तक शिव कथा और उनकी महिमा का गुणगान  न करें तो जीवन का कोई मूल्य नहीं है।  पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महादेव शिवशंकर स्वयं प्रगट हुए है।

भारत में ऐसे कई मंदिर और देवालय हैं, जहां के चमत्कारों पर सहज यकीन नहीं होता है। ऐसी ही एक अनोखी विशेषता वाला मंदिर उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में स्थित है। यहां के भगवान जगन्नाथ मंदिर के बारे में कहा जाता है, यह मौसम, विशेषकर बारिश की सटीक भविष्यवाणी करता है।

हम जब किसी ट्रिप पर या वेकेशन पर जाते हैं तो फैमिली के साथ या फिर  दोस्तों के साथ जाना पसंद करते हैं, लेकिन क्या कभी आपने अकेले किसी ट्रिप का मजा लिया है। नहीं तो एक बार जरुर ले ऐसे ट्रिप का मजा। इससे सिर्फ कुछ नया ही नहीं सीखते हैं बल्कि खुद को पहचानने का भी एक मौका मिलता हैं।

दुनियाभर में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से अपने पैर पसार रहा है। यूरोप के देश इटली में बीते कुछ हफ्तों पहले महामारी से भीषण तबाही मची हुई थी।

धरती पर वो कोना अब भी बहुत खूबसूरत और शांत है। जहां आबादी कम है, चारों ओर लहराते समुद्र के बीच सैकडो़ं द्वीप। इन्हीं द्वीपों में बसे हैं 7 देश जहां कोरोना फटकना तो दूर अभी तक वहां कोई मामला नहीं आया है। जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी में आतंकित है।इन देशों में कोरोना का कोई मामला नहीं है।

आज के समय में यानि कोरोना के दौर में पूरी दुनिया जिंदगी और मौत से जूझ रही है। लोग एक – दूसरे से मिलने से भी हिचक रहे है। लोग इस वक्त क्वारेंटाइन में हैं है

ज्येष्ठ महीने में पड़ने वाला चौथा व आखिरी बड़ा मंगल है आज। इस बार लॉकडाउन में मंदिरों के पट बंद होने हनुमान जी के दर्शन नही किया जा सका। ज्येष्थ का बड़ा मंगल हनुमान जी की आराधना के लिए बेहद खास होता है।

: उत्तराखंड के कुमाऊं मण्डल  में अल्मोड़ा जिला है, अल्मोड़ा एक पहाड़ी जिला है जो की घोड़े के खुर के समान है। अल्मोड़ा जिले का क्षेत्रफल 3072 वर्ग किलोमीटर है। एक कथा के अनुसार कहा जाता है कि अल्मोड़ा की कौशिका देवी ने शुम्भ और निशुम्भ नामक दानवों को इसी क्षेत्र में मारा था।

शहर से करीब आठ किमी दूर मटसेना रोड पर बिलहना गांव में नगरसेन बाबा के नाम से एक प्राचीन मंदिर बना है। इस मंदिर की अनोखी परंपरा है कि नगरसेन बाबा पर अंडा फेंककर मांगी हुई मुराद पूरी हो जाती है। मनौती मांगने के लिए यहां दूसरे जिलों और प्रांतों से भी श्रद्धालु आते हैं।