Late Pregnancy Tips : अधिक उम्र में बनने जा रही हैं मां, इन बातों का रखें विशेष ख्याल

Late Pregnancy Tips : अपने करियर या फिर कुछ अन्य कारणों के चलते महिला लेट प्रेगनेंसी की प्लानिंग करती हैं। हालांकि, कई बार बहुत सी परेशानियां भी खड़ी हो जाती है, जिनका ख्याल रखना जरूरी है।

Update: 2024-02-05 02:15 GMT

Late Pregnancy Tips (Photos - Social Media) 

Late Pregnancy Tips : फैमिली प्लानिंग करना और मां बनना यह सब कुछ एक महिला का निजी फैसला होता है। हालांकि, कई बार लेट प्रेगनेंसी टाइम तरह की परेशानियों का कारण भी बन जाती है। आज हम आपको ये बताते हैं कि ज्यादा उम्र में मां बनने के कारण महिलाओं को क्या-क्या परेशानी होती है। बच्चे को जन्म देने के लिए महिला की सही उम्र की बात करें तो यह 20 से 30 साल के बीच की होती है। इस दौरान प्रजनन अंग और प्रेगनेंसी के लिए जरूरी हार्मोंस सही तरीके से काम करते हैं। बढ़ती हुई उम्र के साथ प्रजनन क्षमता प्रभावित होने लगती है।

मिसकैरिज और प्रीमैच्योर डिलीवरी का खतरा

बढ़ती उम्र में सबसे पहली परेशानी गर्भधारण करने की होती है। इसके बाद अगर महिला प्रेग्नेंट हो भी जाए तो प्रेगनेंसी के दौरान उसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अधिक उम्र में प्रेगनेंसी के दौरान मिसकैरिज का खतरा बना रहता है और बच्चे की प्रीमेच्योर डिलीवरी भी हो सकती है।

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प्लेसेंटा प्रीविया की स्थिति

ऐसे समय में प्रेगनेंसी के दौरान प्लेसेंटा प्रीविया की स्थिति भी बन सकती है। यह एक ऐसी स्थिति होती है जब प्लेसेंटा गर्भाशय ग्रीवा के मुंह को पूरी तरह से ढक देता है जिससे ब्लीडिंग की समस्या होने लगती है। ऐसी स्थिति बनती है तो मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों की जान को खतरा रहता है। इससे दोनों को बचाने के लिए सी सेक्शन से डिलीवरी करना जरूरी हो जाता है।

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बच्चे पर प्रभाव

लेट प्रेगनेंसी का असर बच्चे की सेहत पर भी काफी ज्यादा पड़ता है। जो महिलाएं अधिक उम्र में गर्भ धारण करती हैं उनके बच्चों में डाउन सिंड्रोम होने का खतरा बढ़ जाता है।

इन बातों का रखें ध्यान

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को कई तरह की परेशानी होती है। लेकिन मातृत्व सुख से वंचित रह पाना संभव नहीं है इसलिए कुछ बातों का ख्याल रखकर आराम से इस समय को निकाला जा सकता है। चलिए आपको बताते हैं किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

प्रेगनेंसी के दौरान रेगुलर चेकअप कराना बहुत जरूरी है ताकि गंभीर स्थिति होने पर सही समय पर पता लगाया जा सके।

फाइब्रॉएड ट्यूमर और सिस्ट की समस्या बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं में आम हो जाती है। अगर आप लेट प्रेगनेंसी की प्लानिंग कर रही हैं तो आपको इन चीजों के लिए अल्ट्रासाउंड कर लेना चाहिए।

अधिक उम्र में मां बनने वाली महिलाओं को अपनी डाइट का विशेष तौर पर ख्याल रखना चाहिए। इसके लिए वह न्यूट्रीशनिस्ट की सलाह ले सकती हैं।

उम्र के साथ महिलाओं के शरीर में हार्मोनल इंबैलेंस बढ़ने लगता है जिस वजह से वह थकान महसूस करती हैं। इसके लिए हार्मोनल असंतुलन का इलाज करना जरूरी है।

प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली मुश्किलों के समय महिला को मानसिक संबल की काफी आवश्यकता होती है। ऐसे में जीवनसाथी का सहयोग काफी मददगार होता है।

ऐसे समय में तनाव लेना ठीक नहीं होता है। जितना हो सके तनाव मुक्त रहने की कोशिश करें। यह आपके और आपके होने वाले बच्चे दोनों के लिए जरूरी है।


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