गुजरात चुनाव : पिछले चुनाव परिणाम देख, पसीना बहाने को मजबूर नमो एंड कंपनी
गांधीनगर : गुजरात विधानसभा चुनाव बीजेपी, पीएम मोदी और पार्टी अध्यक्ष के लिए सम्मान का विषय बन गए हैं। पीएम मोदी बाकी सारे काम छोड़ गुजरात में अपनी ताकत झोकें हुए हैं। उनके साथ अमित शाह भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे। पहले के चुनावों को देखते हुए इसबार के चुनाव इन सभी के लिए महत्वपूर्ण बन चुके हैं। पहले जहां सिर्फ कांग्रेस विरोध में होती थी, वहीं इसबार मोदी एंड कंपनी के सामने उनका अपना पाटीदार वोटबैंक बागी बन खड़ा हो गया है।
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पाटीदार नेता निखिल सवानी ने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया। एक और पाटीदार नेता नरेंद्र पटेल ने भी बीजेपी पर कई संगीन आरोप लगाए हैं। पाटीदार बीजेपी को आज शंका की नजर से देख रहे हैं।
अल्पेश ठाकोर, हार्दिक पटेल और जिग्नेष मेवाणी खुलेआम बीजेपी के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं। नोटबंदी और जीएसटी के बुरे प्रभाव से पार्टी अच्छी तरह वाकिफ है। ऐसे में पीएम और पार्टी अध्यक्ष स्वयं चुनाव की कमान अपने हाथ में ले चुके हैं। उन्हें अंदाजा है कि पीएम के तौर पर वो गुजरात को उतना समय नहीं दे सकते। जितना सीएम रहते दिया करते थे। ऐसे में यदि गुजरात हाथ से निकला तो विरोधी जीना दुश्वार कर देंगे।
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पिछले चुनावों के परिणाम देखने पर आपको भी सहज अंदाजा हो जाएगा, कि इस बार के चुनाव में बीजेपी क्यों इतनी ताकत लगा रही है।
चुनाव 2012
पिछले विधानसभा चुनाव में राज्य के वोटर्स पर नरेंद्र मोदी का जादू सिर चढ़ कर बोला और मोदी के नेतृत्व में बीजेपी को 182 सीटों में से 115 पर जीत हासिल हुई जबकि कांग्रेस को 61 सीटों के साथ संतोष करना पड़ा।
चुनाव 2007
इस चुनाव में बीजेपी को 117 सीटें मिली, जबकि कांग्रेस को 59 सीटें मिलीं।
चुनाव 2002
इस विधान सभा चुनाव में बीजेपी को 127 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस को 51।
चुनाव 1998
गुजरात को दो बार मध्यावधि चुनाव की भी बलि चढ़ना पड़ा, 1975 में पहली बार और इसके बाद 1998 में। इस चुनाव में बीजेपी को 117 व कांग्रेस को 53 सीटें मिलीं।
चुनाव 1995
ये चुनाव बीजेपी और मोदी के लिए सबसे खास रहा था। 45 साल के युवा मोदी को केंद्र से भेजा गया था। मोदी के रणनीतिक कौशल के चलते बीजेपी को दो-तिहाई बहुमत वाली सरकार मिली।
निर्दल व छोटे दलों की संख्या नहीं दी गई है।