UP Elections 2022 : टिकटों के चयन में लागू होगा गुजरात मॉडल, लखनऊ के विधायकों समेत कई मंत्री भी हाशिए पर

UP Elections 2022 : यूपी में विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा प्रत्याशियों के चयन में गुजरात मॉडल लागू करने की तैयारी में है।

Written By :  Shreedhar Agnihotri
Published By :  Shraddha
Update:2021-09-29 14:31 IST

Up Election 2022  (डिजाइन फोटो- न्यूजट्रैक)

UP Elections 2022 : उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) को लेकर जहां सारे दल अपनी चुनावी तैयारियों में जुटे हुए हैं वहीं सत्ताधारी दल भाजपा भी प्रत्याषियों के चयन के काम में लग गई है। खास बात यह है कि  इस बार यूपी में विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा प्रत्याशियों के चयन में गुजरात मॉडल (Gujrat Model) लागू करने की तैयारी में है। गुजरात में पिछले दो विधानसभा चुनावों में सिटिंग विधायकों के टिकट काटे जाते रहे हैं। वहीं फार्मूला इस बार यूपी में लागू होने जा रहा है। इसके तहत राजधानी समेत पूरे प्रदेश के 304 BJP MLAs में 100 से 125 टिकट काटे जाने की संभावना है। यहां तक कि भाजपा सरकार में शामिल कई मंत्रियों के भी टिकट काटने की योजना तैयार हो चुकी है।


भाजपा के इस फार्मूले को गुजरात फार्मूला इसलिए भी कहा जाता है कि इसकी शुरुआत वही से हुई। 2014 में अहमदाबाद पूर्व से तीन बार के सांसद हरेन पाठक का टिकट काटकर अभिनेता परेश रावल को टिकट दिया गया। । जबकि 2019 में छह बार के लगातार सांसद और पार्टी के शिखर पुरुष लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) का भी टिकट काटा जा चुका है। इसके बाद कई अन्य उदाहरण भी सामने आ चुके हैं।   इसी तरह 2017 के दिल्ली में हुए एमसीडी चुनाव में भी भाजपा ने कई पार्षदों के टिकट काट कर नए चेहरों पर अपना दांव लगाया था। जबकि 17 वीं लोकसभा के हुए चुनाव में अपने 21 सांसदों के टिकट काट कर दूसरे कार्यकर्ताओं को चुनाव मैदान में उतारा । जिसका भाजपा को लाभ मिला तो नुकसान भी हुआ। भाजपा ने जिन 21 सांसदों के टिकट काटकर दूसरे प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा उनमें से केवल 4 प्रत्याशी ही चुनाव हारे बाकी सभी को सफलता मिली।


गुजरात मॉडल (कॉन्सेप्ट फोटो- सोशल मीडिया)


इस बार भी यूपी में राजधानी समेत प्रदेश के अन्य जिलों में विधायकों के टिकट काटे जाने की तैयारी है। इसके अलावा मंत्री पद पर काबिज कई विधायकों के टिकट काटने के साथ ही अन्य विधानपरिषद सदस्यों को इस बार विधानसभा चुनाव में भी उतारने की तैयारी है।

यहां यह बताना जरूरी है कि पिछले साढे चार साल के कार्यकाल के दौरान लगभग दो दर्जन के आसपास तो ऐसे विधायक हैं जिनके आडियो वीडियो वायरल हो चुके हैं। कई विधायकों ने तो अपनी ही पार्टी के खिलाफ अनुशासनहीनता करने का काम किया है। जो पार्टी नेतृत्व के सीधे निशाने पर हैं। जबकि कुछ विधायकों ने विकास कार्यो में दिलचस्पी नहीं ली।जिसके कारण उनके टिकट काटे जाने की योजना है। साथ ही कई उम्रदराज विधायक भी इसी श्रेणी में आ रहे हैं। इसलिए कई भाजपा विधायकों ने दूसरे दलों के कार्यालयों में चक्कर लगाना शुरू कर दिया है।

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