FATF

कोरोना संकट में भी पाकिस्तान अपने नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। आतंकियों के लिए स्वर्ग पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने के लिए फिर चाल चली है। अब उसने आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का नाम ही बदल दिया है।

चीन एक बार फिर पाकिस्तान की ढाल बन कर सामने आया है। चीन ने पाकिस्तान को एफएटीएफ की सूची में ब्लैकलिस्ट होने से बचा लिया। देते रहेंगे पाकिस्तान को सहायता

पाकिस्तान को अपनी कथनी और करनी का बीच का अंतर पाटना ही होगा। पाकिस्तान आखिर चीन के सहारे कब तक अपनी खैर मनाता रहेगा। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) का दबाव उस पर लगातार बढ़ता जा रहा है।

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में ही बरकरार रखा है। लेकिन इसके बावजूद भी पाकिस्तान की इमरान खान सरकार के लिए इसे राहत नहीं माना जा रहा है।

फ्रांस की राजधानी पेरिस में फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स (Financial Action Task Force/FATF) की एक अहम बैठक शुरू हो चुकी है। ये बैठक 21 फरवरी तक चलेगी। इस बैठक में पाकिस्‍तान के भविष्‍य को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे से ठीक पहले आतंकवादी संगठन जैश-ए-मुहम्मद ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें बदला लेने की बात कही गई है। इस वीडियो में पवित्र ग्रंथ 'कुरान शरीफ' की आयत का हवाला देकर कहा गया है-'अगर किसी ने कत्ल किया है तो उसे माफ नहीं किया जाएगा।

पाकिस्तान एफएटीएफ की सुनवाई के बाद हाफिज सईद को रिहा कर सकता है। 16 फरवरी से पैरिस में एफएटीएफ की बैठक में तय होगा कि पाक ब्लैक लिस्ट में रहेगा या नहीं.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से प्रकाशित रिपोर्ट ‘कंट्री रिपोर्ट्स ऑन टेररिज्म-2018’ के अनुसार पाकिस्तानी सरकार धनशोधन एवं आतंकवाद निरोध पर वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) की कार्य योजना को लागू करने में विफल रहा। 

एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) की बैठक में पाकिस्तान कुछ महीनों के लिए ब्लैक लिस्ट होने से बच गया है। आतंकवाद को रोकने के लिए सुझाए गए उपायों पर ठोस कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान को अब फरवरी, 2020 तक का वक्त दिया गया है लेकिन तब तक वो ग्रे-लिस्ट में ही रहेगा।