pervez musharraf

दरअसल पाकिस्तान के 72 वर्ष के वजूद में लगभग आधे समय तक सेना ने शासन किया है जिसमें तीन अन्य जनरलों- अयूब खान, याह्या खान (जिन्होंने अयूब खान से कमान संभाली) और जिया-उल-हक ने भी जबरन सत्ता पर कब्जा किया और संविधान का उल्लंघन किया।

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और तानाशाह परवेज मुशर्रफ को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। अब कोर्ट ने अपने एक विस्तृत फैसले में बेहद अजीबोगरीब बयान दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि मुशर्रफ को फांसी दिए जाने से पहले उनकी मौत हो जाती है।

कोर्ट ने कहा कि यदि मुशर्रफ को फांसी दिए जाने से पहले उनकी मौत हो जाती है तो उनके शव को इस्लामाबाद के सेंट्रल स्क्वायर पर घसीटकर लाया जाए और तीन दिन तक लटकाकर रखा जाए।

67 पन्नों के विस्तृत फैसले को पेशावर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश वकार अहमद सेठ ने लिखा है। वकार सेठ ने ही तीन सदस्यीय अदालत का नेतृत्व किया था और इसी अदालत ने मुशर्रफ को संविधान को नष्ट करने के लिए मंगलवार को मौत की सजा सुनाई थी।

परवेज मुशर्रफ को देशद्रोह के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई है। परवेज मुशर्रफ इन दिनों दुबई के एक हॉस्पिटल में एडमिट हैं। सजा मिलने के बाद उन्होंने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वह बहुत ही तक्लीफ में कराहते हुए दिख रहे हैं।

तमिलनाडु से बीजेपी नेता और राज्‍यसभा सांसद स्‍वामी ने ट्वीट करते हुए कहा कि 'हम परवेज मुशर्रफ को फास्‍ट ट्रैक आधार पर नागरिकता दे सकते हैं क्‍योंकि वह दरियागंज से हैं और उत्‍पीड़न का सामना कर रहे हैं।

जनरल परवेज मुशर्रफ को देशद्रोह के अपराध में सजा-ए-मौत हो गई। यह अनहोनी है। क्यों है ? क्योंकि आज तक किसी पाकिस्तान की अदालत की यह हिम्मत नहीं हुई कि वह अपने किसी फौजी तानाशाह को देशद्रोही कहे और उसे मौत के घाट उतारने की हिम्मत करे।

पाकिस्तान के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि किसी पूर्व आर्मी प्रमुख को देशद्रोह के मामले में दोषी ठहराया गया है और उसे मौत की सज़ा सुनाई गई।

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और तानाशाह परवेज मुशर्रफ को पाकिस्तान की कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई है। परवेज मुशर्रफ को मिली यह सजा साल 2007 में पाकिस्तान में आपातकाल लगाने के जुर्म में सुनाई गई। परवेज मुशर्रफ के खिलाफ दिसंबर 2013 में देशद्रोह का केस दर्ज किया गया था।

27 दिसंबर 2007 को पाकिस्तान के रावलपिंडी में एक चुनावी रैली में हुए हमले में बेनजीर भुट्टो की हत्या कर दी गई थी। इसके पीछे किसका हाथ था, यह अब तक साफ नहीं हुआ है।