लोकसभा में दिल्ली हिंसा पर बोले शाह, संपत्ति जलाने वालों की संपत्ति करेंगे जब्त

लोकसभा में बुधवार को दिल्ली हिंसा पर चर्चा हुई जिसमें करीब सभी मुख्य विपक्षी पार्टियां शामिल हुईं। चर्चा के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के हर सवालों का जवाब दिया। गृह मंत्री ने दिल्ली हिंसा को एक गहरी साजिश बताया। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि दिल्ली में हिंसा फैलाने के लिए 300 लोग यूपी से आए थे।

दिल्ली: लोकसभा में बुधवार को दिल्ली हिंसा पर चर्चा हुई जिसमें करीब सभी मुख्य विपक्षी पार्टियां शामिल हुईं। चर्चा के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के हर सवालों का जवाब दिया। गृह मंत्री ने दिल्ली हिंसा को एक गहरी साजिश बताया। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि दिल्ली में हिंसा फैलाने के लिए 300 लोग यूपी से आए थे। अमित शाह ने कहा कि इस मामले में जो भी दोषी होगा उसको छोड़ा नहीं जाएगा। दिल्ली पुलिस 36 घंटे के अंदर हिंसा रोकने में सफल रही। शाह के भाषण के दौरान कांग्रेस ने वॉक आउट किया।

अमित शाह ने साफ कहा कि दिल्ली हिंसा को सुनियोजित षड्यंत्र के तहत अंजाम दिया गया और इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, वहीं किसी निर्दोष को तकलीफ नहीं होने दी जाएगी। लोकसभा में दिल्ली हिंसा पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने दिल्ली हिंसा में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी।

गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में दिल्ली हिंसा पर जवाब दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंसा में जिन लोगों की जान गई उनके प्रति दुख जताता हूं। उन्होंने कहा कि सबसे पहले मैं इन दंगों के दौरान जिन लोगों की जान गई हैं, उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और उनके परिवारों के प्रति भी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। गृह मंत्री ने कहा कि 24 फरवरी की दोपहर दो बजे हिंसा की पहली घटना की सूचना आई और 25 फरवरी को रात 11 बजे के बाद सांप्रदायिक हिंसा की कोई घटना नहीं घटी।

शाह ने कहा कि विगत कुछ दिनों में जिस प्रकार से देश और दुनिया में इन दंगों को प्रस्तुत किया जा रहा है और आज भी इस सदन में जिस प्रकार से रखने का प्रयास हुआ है, मैं बड़े संयम के साथ इसको स्पष्ट करना चाहूंगा। अमित शाह ने कहा कि पुलिस ने दंगे को दिल्ली में फैलने नहीं दिया। ये हिंसा दिल्ली के 4 प्रतिशत और 13 प्रतिशत आबादी में सीमित रखने का काम पुलिस ने किया। 12 थानों में हिंसा रुकी रही। भड़काने का काम हर जगह हुआ। पुलिस की जिम्मेदारी थी हिंसा को रोकना।

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उन्होंने कहा कि 24 फरवरी को 2 बजे के आसपास पहली सूचना मिली। 25 फरवरी को रात 11 बजे आखिरी सूचना मिली। दिल्ली पुलिस ने 36 घंटे में हिंसा को समेटना का काम किया। डोनाल्ड ट्रंप का कार्यक्रम पहले से तय था। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मैं डोनाल्ड ट्रंप के कार्यक्रमों में बैठा था। मेरा जाना भी पहले से तय था। मैं जिस दिन गया उस दिन कोई घटना नहीं हुई। शाह ने कहा मैं दिल्ली शाम को 6:30 बजे वापस आ गया था। मैं ताजमहल देखने नहीं गया था। मैं सीधा दिल्ली आया। उसके बाद दूसरे दिन राष्ट्रपति भवन में ट्रंप की अगवानी हुई। मैं वहां नहीं गया। दोपहर को लंच हुआ मैं वहां नहीं गया। रात को डिनर हुआ मैं डिनर में भी गया नहीं गया।

उन्होंने कहा कि पूरा समय मैं दिल्ली पुलिस के साथ बैठकर इस पूरे मामले की समीक्षा कर रहा था। मैंने ही अजीत डोभाल से विनती की थी कि आप जाइए और पुलिस का मनोबल बढ़ाइए। मैं इसलिए नहीं गया कि मेरे जाने से पुलिस मेरे पीछे लगती और पुलिस दंगे रोकने में अपने बल को नहीं लगा पाती।

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गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि उत्तर-पूर्व इलाका उत्तर प्रदेश की सीमा से जुड़ा हुआ है। मैं इतना कहना चाहता हूं कि सीआरपीएफ भेजनी चाहिए, सदस्य इसके लिए सुझाव दे सकते हैं, लेकिन मैं उनको यह बता दूं कि सीआरपीएफ, 22 और 23 तारीख को कुल 30 कंपनी, 24 तारीख को 40 कंपनियां, 25 तारीख को और 50 कंपनियां भेजी गई थीं। 26, 27, 28 और 29 तारीख को 80 से ज्यादा कंपनियां तैनात की गई हैं जो अभी वहां पर तैनात की गई हैं। गुनहगारों को पकड़ने के लिए पूरी व्यवस्था शुरू कर दी गई है।

उन्होंने कहा 27 तारीख से अब तक 700 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की गई है ।गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा दिल्ली में हिंसा फैलाने के लिए 300 से ज्यादा लोग यूपी से आए थे। यह गहरी साजिश थी। गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि दंगाइयों के ड्राइविंग लाइसेंस और सोशल मीडिया अकाउंट से उनकी पहचान हो रही है। इन दंगों में 52 भारतीयों की मौत हुई है।

अमित शाह ने कहा कि देशभर में सीएए के समर्थन में भी रैलियां निकली हैं। ये भ्रम फैलाया जा रहा है कि प्रो-सीएए वाले लोग निकले इसलिए हिंसा हुई। अमित शाह ने सोनिया गांधी का बिना नाम लिए निशाना साधते हुए कहा कि 14 फरवरी को सीएए के खिलाफ रामलीला मैदान में एक पार्टी की बड़ी रैली की गई। पार्टी की अध्यक्ष ने अपने भाषण में कहा- घर से बाहर निकलो। यह आर-पार की लड़ाई का वक्त है। कांग्रेस नेता कहते हैं कि अभी नहीं निकलोगे तो कायर कहलाओगे। आर-पार की लड़ाई करो। ये हेट स्पीच नहीं है तो क्या है। एक स्पीच होती है 17 फरवरी को। 24 फरवरी को ट्रंप जब भारत आएंगे तो हम बताएंगे कि भारत की सरकार क्या कर रही है। इसके बाद हिंसा की शुरुआत होती है। वारिस पठान 19 फरवरी को कहते हैं कि जो चीज मांगने से नहीं मिलती उसे छीननी पड़ती है। इसके बाद 24 फरवरी को दंगे होते हैं।

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उन्होंने कहा कि हिंसा के लिए जो भी जिम्मेदार होगा उसको छोड़ा नहीं जाएगा। 100 से ज्यादा हथियार बरामद किया गया है। हिंसा को फंड देने वाले 3 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। किसी भी निर्दोष को सजा नहीं दी जाएगी। पूरे सबूत के बाद गिरफ्तारी की जा रही है। अमित शाह ने कहा कि पूरे दंगे में बहुत संपत्ति जली है। इसका मुझे दुख है। सार्वजिनक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से वसूली होगी। आगजनी करने वालों की संपत्ति जब्त होगी।

उन्होंने कहा कि इस हिंसा में मस्जिद ही नहीं मंदिर भी जले हैं। सबसे ज्यादा दंगे कांग्रेस के कार्यकाल में हुए। 1984 में 3000 सिख मार दिए गए, क्या हुआ। मोदी सरकार के आने के बाद कार्रवाई हुई। उससे पहले कांग्रेस के किसी भी नेता को सजा नहीं मिली। दंगा किसी को भी अच्छा नहीं लगता है। दिल्ली हिंसा साजिश के तहत हुई। दंगे में मारे गए सभी लोगों के परिवार को आश्वासन देता हूं कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इससे पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने अपनी-अपनी बात रखी। तो वहीं लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने सांसदों के व्यवहार पर नाराजगी जाहिर की।

ओवैसी पर गृह राज्य मंत्री का सनसनीखेज आरोप

गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने असदुद्दीन ओवैसी के ऊपर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हैदराबाद के इलाके में इन्होंने कई जगहों पर हिंदुओं के घर खाली कराए और कई लोगों को मारा।

लोगों की जान बचाने में नाकाम रहे पीएम: असदुद्दीन ओवैसी

AIMIM के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पीएम लोगों की जान बचाने में नाकाम रहे हैं। ऐसा दूसरी बार हुआ है। जब भारतीयों को मारा जा रहा था तो ट्रंप के आगमन पर नेवी बैंड क्यों प्ले किया जा रहा था। दिल्ली हिंसा सांप्रदायिक दंगा नहीं, एक प्रोग्राम है।

उन्होंने कहा कि आप शर्मिंदा नहीं हैं, बल्कि नाले में पड़े शवों पर गर्व करते हैं। मस्जिदें जलाई गईं। मस्जिद पर भगवा झंडे फहराए जा रहे। ओवैसी ने कहा कि उनकी आंखें कभी नहीं रोती हैं, उनको दुख नहीं होता है। 54 लोग मारे गए, गृह मंत्री क्यों नहीं बताते हैं कि कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच कहां है। अंकित शर्मा और फैजान की हत्या की जांच होनी चाहिए।

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महाराष्ट्र में भाईचारा कायम: NCP

एनसीपी सांसद अमोल रामसिंह कोल्ही ने कहा कि शाहीन बाग जैसे धरने महाराष्ट्र में कई जगह हो रहे हैं लेकिन महाराष्ट्र सरकार के संवाद की वजह से वहां भाईचारा अभी भी कायम है।

अल्पसंख्यकों में क्यों भ्रम पैदा किया जा रहा: जेडीयू

जेडीयू सांसद राजीव रंजन ने लोकसभा में कहा कि सीएए के विरोध के नाम पर देशभर में अलग-अलग विरोध प्रदर्शन करके देश का माहौल खराब किया जा रहा है। सीएए का विरोध करना है तो सकारात्मक विरोध करिए, नकारात्मक विरोध क्यों कर रहे हैं? आपको सीएए का विरोध करना है तो सरकार से कहिए न कि हम कि एक्ट के इस प्रावधान का विरोध करते हैं। जब प्रधानमंत्री ने कह दिया है कि एनआरसी लाने का कोई विचार नहीं है तो फिर सीएए को एनआरसी से जोड़कर देश के अल्पसंख्यकों में क्यों भ्रम पैदा किया जा रहा है?

शिवसेना ने गृह मंत्री और इंटेलीजेंस एजेंसियों पर उठाए सवाल

शिवसेना सांसद विनायक राउत ने कहा कि जब दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रंप दिल्ली आए थे तो दिल्ली में जो हिंसा हुआ उससे हमारे देश की छवि खराब हुई है। इतनी लोगों की जानें चली गईं, ऐसे में हमारे देश के गृह मंत्री और इंटेलीजेंस एजेंसियां क्या कर रही थीं? शाहीन बाग में 20-25 लोगों से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन में हजारों की तादाद में लोग शामिल हो गए, गृह मंत्री और इंटेलीजेंस एजेंसियां क्या कर रही थीं?

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भगवान के नाम पर इस्तीफा दे दें शाह: सौगत रॉय

टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने गृह मंत्री अमित शाह पर हमला बोलते हुए कहा कि मैंने देखा कि ट्रंप के आगमन पर अमित शाह मोटेरा में थे। इस वक्त दिल्ली में हिंसा हुई। 26 फरवरी को स्थिति सामान्य हुई। अजीत डोभाल के सड़क पर उतरने के बाद शांति आई। गृह मंत्री क्यों नहीं गए और उनको इस्तीफा देना चाहिए। भगवान के नाम पर वह इस्तीफा दे दें। सौगत रॉय ने दिल्ली हिंसा की न्यायिक जांच की मांग की।

नफरत की राजनीति करती है कांग्रेस: मीनाक्षी लेखी

बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा कि हिंसा में मरने वाले भारतीय थे। कोई बांग्लादेशी हो इसकी जानकारी मुझे नहीं है। आईबी के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या की गई। उनपर 400 बार चाकुओं से हमला हुआ और मैं लोगों की मौत से दुखी हूं। मीनाक्षी लेखी ने दिल्ली बीजेपी के नेता कपिल मिश्रा का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि शरजील इमाम की हरकतों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। वो लोग जो पीएम को कातिल और अमित शाह को तड़ीपार कहते हैं। आप कपिल मिश्रा को दिल्ली हिंसा के लिए कैसे जिम्मेदार ठहरा सकते हैं। पूरी हिंसा सीएए के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर हुई।

मीनाक्षी लेखी ने कहा कि 14 फरवरी को सोनिया गांधी ने कहा कि कायर हैं वो लोग जो घर से नहीं निकले। इसके बाद उमर खालिद ने कहा कि सड़कों पर उतरना है। वारिस पठान ने कहा कि हम 15 करोड़ हैं लेकिन सबपर भारी पड़ेंगे, इनके बयानों के लिए कपिल मिश्रा को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

मीनाक्षी लेखी ने कहा कि आजादी के बाद सबसे ज्यादा दंगे कांग्रेस के कार्यकाल में हुए। उन्होंने कहा कि टॉप 10 दंगे कांग्रेस के समय में हुए। 2002 के बाद गुजरात में कोई दंगे नहीं हुए। आज दिल्ली रो रही होगी। लोगों ने मुफ्त बिजली और पानी के लिए एक पार्टी को वोट दिया, लेकिन हमने देखा कि दंगे में करोड़ों का नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि दिल्ली बीजेपी के सांसदों ने शांति लाई। उन्होंने कांग्रेस सांसद चौधरी को जवाब देते हुए कहा कि अगर अजीत डोभाल हिंसाग्रस्त इलाकों में जाते हैं तो क्या गलती है? वह NSA हैं। कांग्रेस नफरत की राजनीति करती है।

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बीजेपी सांसद ने कहा कि 24 फरवरी को गृह मंत्री बैठक कर रहे थे। गृह मंत्रालय के सभी अधिकारी बैठक में थे। अमित शाह ने 1 बजे तक अधिकारियों को निर्देश दिया। 25 फरवरी की सुबह उन्होंने फिर अधिकारियों के साथ बैठक की। हिंसा रोकने के लिए उन्होंने उच्च नेताओं से मुलाकात की और 26 फरवरी को उन्होंने फिर बैठक की।

हिंसा में किसी की जय नहीं होती और पराजय सिर्फ इंसानियत की होती है: अधीर रंजन

दिल्ली हिंसा पर कांग्रेस सांसद अधीर रंजन ने कहा कि काफी समय से इस चर्चा की मांग हो रही थी। होली का त्योहार खत्म हुआ है, लेकिन दिल्ली की खून की होली हमारा पीछा नहीं छोड़ती। सारे हिंदुस्तानी बैचेन हैं और जानना चाहते हैं कि कैसे ये घटना हुई और सरकार क्या कार्रवाई कर रही है कि दोबारा ऐसी घटना नहीं हो। उन्होंने कहा कि हिंसा में किसी की जय नहीं होती और पराजय सिर्फ इंसानियत की होती है। कोई कहता है कि कहीं हिंदू मरे, कहीं मुस्लिम मरे, लेकिन मरा तो एक इंसान है।

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उन्होंने कहा कि सरकार बालाकोट में स्ट्राइक कर सकती है, लेकिन हिंसा नहीं रोक सकती। अधीर रंजन ने कहा कि सरकार कोशिश करती तो दिल्ली हिंसा को रोका जा सकता है। ये देश की राजधानी है। यहां की पुलिस को हम मॉर्डन मानते हैं। हथियार की कोई कमी नहीं है। फिर ये घटना क्यों घटी और तीन दिन लगातार ये घटना कैसे घटी। सरकार को जवाब देना होगा। गृह मंत्री अमित शाह तीन दिन तक कहां थे। दिल्ली के कानून की जिम्मेदारी उनके पास है। अधीर रंजन ने कहा कि जब दिल्ली जल रही थी तो अहमदाबाद में ट्रंप का स्वागत किया जा रहा था. तीन दिन तक दिल्ली में जो हिंसा हुई उसमें आपकी क्या जिम्मेदारी थी. आपके दिल्ली के सांसद और विधायक कहां थे। गृह मंत्री से मैं जानना चाहता हूं कि आप खुद क्या कर रहे थे।

अधीर रंजन ने NSA अजीत डोभाल की तारीफ की। उन्होंने कहा कि अजीत डोभाल के सड़क पर उतरते ही हिंसा थम गई। जहां अजीत डोभाल जा सकते हैं वहां अमित शाह क्यों नहीं जा सकते? गृह मंत्री के अलावा दो गृह राज्य मंत्री हैं उसके बाद भी अजीत डोभाल हिंसाग्रस्त इलाकों में गए। दिल्ली के कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी उनके पास नहीं है।

सदन की घटना से मुझे पीड़ा: स्पीकर

लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि दुनिया के अंदर भारत के लोकतंत्र की चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि और हमने इस देश में कई उतार चढ़ाव देखे। जब-जब भी संसद पर बात आई तो सभी दलों ने संसदीय मर्यादाओं की चर्चा की। संसद देश की 130 करोड़ की जनता की उम्मीदों का मंदिर है। सब चाहते हैं कि संसद में वाद-विवाद सही से हो। ओम बिड़ला ने कहा कि पिछले 8 महीने संसद में आप सबके सहयोग से एक कीर्तिमान स्थापित हुआ। जनता का विश्वास और भरोसा संसद के प्रति बढ़ा है। यह सब आप सबके सहयोग से संभव हुआ। जनता का विश्वास संसद के प्रति बढ़ता जा रहा है। सदन में जो घटना पिछले दिनों घटी उससे मुझे पीड़ा हुई। मैं नहीं चाहता कि सदन में व्यवधान पैदा हो।

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कांग्रेस ने जताई खुशी

कांग्रेस सांसद अधीर रंजन ने कहा कि आपको (ओम बिड़ला) दोबारा यहां देखकर खुशी हो रही है। कभी-कभी ऐसा कुछ हो जाता है जो हम नहीं चाहते हैं। हम भी चाहते हैं कि सदन की कार्यवाही अच्छे से चले। उन्होंने कहा कि हम विरोध के मकसद से नहीं आते हैं। सांसदों के निलंबन पर उन्होंने कहा कि हो सकता है कुछ गलती हुई हो, लेकिन उसकी जांच हो। बता दें कि सांसदों के आचरण से नाराज होकर लोकसभा स्पीकर तीन दिन तक लोकसभा में नहीं आए थे।

-लोकसभा के स्पीकर ओम बिड़ला की सभी राजनीतिक पार्टी के नेताओं के साथ कांग्रेस के सात सांसदों के निलंबन को लेकर बैठक की गयी। कांग्रेस के सातों सांसदों का निलंबन वापस किया जाएगा।

चर्चा के लिए इन्होंने दिया था नोटिस

दिल्ली हिंसा पर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह,  कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी और भाजपा की मीनाक्षी लेखी ने आज लोकसभा में ‘दिल्ली के कुछ हिस्सों में कानून व्यवस्था की स्थिति’ पर चर्चा के लिए नोटिस दी थी।

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सांसदों को स्पीकर से मिल चुकी है हंगामे को लेकर चेतावनी

इससे पहले सांसदों के हंगामे को लेकर स्पीकर ने ये व्यवस्था की थी कि सदन के दोनों ओर से कोई सांसद एक दूसरे की ओर नहीं जाएगा। ऐसा किये जाने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।

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बता दें कि दिल्ली हिंसा को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ था। इस पर सरकार ने बीते हफ्ते सदन में कहा था कि उसे दिल्ली हिंसा पर चर्चा से कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते प्रश्नकाल चलाया जाने दिया जाए। वहीं लोकसभा में स्पीकर ओम बिड़ला ने सदन की कार्रवाई के दौरान कहा था कि होली के बाद इस मामले पर सदन में चर्चा होगी।

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