Nizamuddin

देश में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन लगाया गया है। सड़के-गलियां सभी सूनसान पड़ी हैं। अप्रवासियों के दिल्ली से अपने गांव घर लौटने का सिलसिला ऐसा चला कि ये मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।

कोरोना वायरस के डर के चलते मरकज के पास मौजूद निजामुद्दीन थाने में तैनात करीब दर्जनभर पुलिस कर्मियों ने अपने सिर मुंडवा लिए हैं।

इसका कारण यह है कि पुलिस को टेलीकॉम टावर से किसी ख़ास इलाक़े में आने-जाने वाले लोगों के सेलफ़ोन नंबर मिल जाते हैं और इसके बाद पुलिस का काम सिर्फ इतना रह जाता है कि वह इस इलाके में आने से पहले कहां एक्टिव थे और यहां से जाने के बाद कहां एक्टिव हैं।

दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज का कोरोना कनेक्शन सामने आने के बाद से ही पूरे देश में हड़कंप मच गया है। वहीं अब बड़ी खबर सामने आ रही है कि निजामुद्दीन के तबलीगी मरकज से हरियाणा के बढ़ासा आए 55 लोगों में से 52 में कोरोना की पुष्टि हुई है।

दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात में हुआ कोरोना वायरस विस्फोट पूरे देश में तबाही मचाने को तैयार है। ऐसे में तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद के खिलाफ मामला दर्ज हो गया और उनकी तलाश की जा रही है, लेकिन पुलिस को अब तक मौलाना साद का कोई सुराग नहीं मिल सका है।

राजधानी स्थित निजामुद्दीन की जमात में हिस्सा लेने वाले पहले मरकज छोड़कर जाने को तैयार नहीं थे। अब जब उन्हें क्‍वारंटीन सेंटर में रखा गया है तब ये इलाज कर...

देश की राजधानी के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमाअत के मरकज से होकर इत्रनगरी आए 11 लोगों को लेकर जिला प्रशासन संजीदा है। यहां के मरकज में ठहरे हुए सभी लोगों को क्वारंटाइन करवा दिया गया है।

दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित तबलीग़ी जमात का मरकज कोरोना बम बन बन गया है, जिसमें आवाज तो नहीं थीं लेकिन धमाका इतना जोरदार हुआ कि भारत के कई राज्य इसकी चपेट में आ गए। तबलीग़ी जमात से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए राज्यों में से एक है, तमिलनाडु। मरकज से राज्य में लौटे 110 लोग कोरोना से संक्रमित हैं। ऐसे में अब तमिलनाडु में संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 234 हो गया है।

राजधानी के निजामुद्दीन क्षेत्र में तबलीगी जमात के एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल लोगों की कोरोना से मौत के बाद बिहार में भी एक ऐसे ही...

तबलीगी जमात का पहला धार्मिक कार्यक्रम भारत में 1941 में हुआ था। इस कार्यक्रम में 25,000 लोग शामिल हुए थे। 1940 के दशक तक जमात का कामकाज भारत तक ही सीमित था, लेकिन बाद में इसकी शाखाएं पाकिस्तान और बांग्लादेश तक फैल गईं।