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बिजली जाने पर जलायी जाने वाली मोमबत्तियों का फेस्टिवलस में सजावट और जगमगाहट के लिए उपयोग करने से इनका ट्रेंड बढ़ रहा है और इसी के चलते बाजारों में तरह-तरह के डिजाइनों के कैंडल्स आ रहे है।

विश्व बैंक ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग जारी कर दी है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में भारत की स्थिति में पहले से सुधार हुआ हैं। इस रैंकिंग में भारत ने इस साल 14 पायदान की ऊंची छलांग लगाई है और अब 63वें स्थान पर पहुंच गया है।

करवा चौथ एक ऐसा त्योहार है जिसका इंतजार नए और पुराने दोनों ही तरह के शादीशुदा कपल्स बेसब्री से करते हैं, क्योंकि इसी व्रत के जरिए ही कपल्स इस खास अवसर पर एक-दूसरे के प्रति अपने प्यार को जाहिर करते हैं।

आज बढ़ते शहरीकरण के कारण ईंटों की उपलब्धता काफी कम हो गई है। इस समस्या से निपटने के लिए अधिकांश बिल्डर फ्लाई ऐश ईंटों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

आशुतोष सिंह वाराणसी : कारोबार की दृष्टि से महत्वपूर्ण पूर्वांचल में मंदी तेजी से पैर पसार रही है। खासतौर से बनारसी साड़ी और कालीन का कारोबार सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है। कारोबार लगभग ठप सा पड़ा है। गोदामों में माल बनकर तैयार है, लेकिन पूछने वाला कोई नहीं। निर्यातकों से ऑर्डर मिलने बंद …

इस सूचना का सीधा असर देश के शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। बताया जा रहा है कि आज शेयर बाजार जबरदस्त गिरावट के साथ बंद हुआ है। जहां सेंसेक्स 770 अंकों की गिरावट के साथ 36,562.91 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं दुसरी तरफ, निफ्टी 225 अंकों की गिरावट के साथ 10,797 अंक लुढ़क कर बंद हुआ।

पूर्णिमा श्रीवास्तव गोरखपुर: इसे मित्र राष्ट्र नेपाल की चीनपरस्ती कहें या फिर राष्ट्रवाद का उभार। सिर्फ सोशल मीडिया पर फैली एक अफवाह ने भारत-नेपाल के बीच 60 अरब के कारोबार को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। फल-सब्जी से लेकर कई खाद्य पदार्थों और जरूरी वस्तुओं का आयात-निर्यात करने वाले दोनों देशों के हजारों कारोबारियों …

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सर्वे के अनुसार, भुवनेश्वर में घर खरीदना जितना आसान है, वो मुंबई में उतना ही मुश्किल है। बता दें कि  RBI ने आवासीय संपत्ति मूल्य निगरानी सर्वे (आरएपीएमएस) किया है।

रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कारपोरेशन (आरईसी) में सरकार की 52.63 प्रतिशत हिस्सेदारी लेने के एवज में पीएफसी ने आज सुबह आरटीजीएस (रीयल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) के जरिये सरकार को 14,500 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया।

विदेशी निवेश वाले आन लाइन कंपनियों के लिए घोषित नई नीति से नए साल में कई कंपनियों को नुकसान होगा तो कई फायदे में भी रहेंगी। कन्ज्यूमर को यह नुकसान होगा कि उसे आनलाइन शापिंग से जो तमाम तरह के लाभ मिलते हैं वह अब नहीं मिल पाएंगे।