दिक्कतों के बावजूद वायनाड ने दिखाया दम, अब तक तीन पॉजिटिव

अब तक, केवल पांच श्रेणियों के लोगों को जिले में प्रवेश करने की अनुमति है – वे जो मृतक के साथ आते हैं,  मृतक के परिवार से मिलने आते हैं,  अंतिम संस्कार में शामिल होना चाहते हैं, जो सरकारी अस्पतालों में क्वारंटाइन पूरा कर चुके हैं,  जिले के बाहर से कोविड-19 नेगेटिव प्रमाण पत्र के साथ आए हैं या जो अस्पतालों में अन्य बीमारी के लिए इलाज कर रहे हैं।

कोझीकोड। कर्नाटक और तमिलनाडु से केरल के वायनाड की सीमाएं मिलती हैं। तीन राज्यों के आवागमन का ये प्रमुख रास्ता है, पर्यटकों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य है और यहाँ की हेल्थ सेवाओं की स्थिति बेहद खराब है। वायनाड में कुछ डॉक्टरों को ही वेंटिलेटर चलाना आता है। इन सब दिक्कतों के बावजूद वायनाड कोरोना वायरस से मजबूती से लड़ रहा है। जिले में अब तक केवल तीन पॉज़िटिव केस आए हैं। जिनमें से दो को पहले ही छुट्टी दे दी गई है। सभी तीन बाहर से आए हुये लोग और उनमें से केवल एक ने ही वायरस को प्रसारित किया है। वायनाड ने भीलवाड़ा से अलग नजीर पेश की है।

जिले की आबादी आठ लाख है और 12 हजार से अधिक लोगों को होम क्वारंटाइन में रखा गया है। अब तक लॉकडाउन उल्लंघन के 1690 मामले दर्ज किए गए हैं, जो जनसंख्या के आंकड़ों को देखते हुए राज्य में सबसे अधिक है। जिला कलेक्टर अधीला अब्दुल्ला कहती हैं, “नियमों को सख्त तरीके से लागूना हमारी सफलता की कुंजी है। हम 15 मार्च से काम कर रहे थे। पहले दिन उल्लंघन का पहला मामला एक मजबूत संदेश भेजकर दर्ज किया गया था।”

जागरूकता

वायनाड के जागरूक नागरिकों ने भी मदद की है। मिसाल के तौर पर मन्थनवाडी में वल्लियोयोरकावु भगवती मंदिर में उत्सव को रद्द किया गया जबकि हमेशा से एक प्रमुख आकर्षण रहा है। त्योहार के आयोजकों ने इसे रद करने के लिए खुद जिला प्रशासन से संपर्क किया। अधीला अब्दुल्ला कहती हैं, “यह एक बड़ा संदेश था जो दूसरों को भी प्रेरित करता था। उल्लंघन करने वालों पर केस दर्ज करने में कोई कमी नहीं की गई थी। इस मूड ने एक अनुकूल माहौल बनाया।”

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पांच से अधिक लोगों के साथ सभा आयोजित करने के लिए तीन मस्जिद समितियों के खिलाफ मामला दायर किया गया था।

जियो टेगिंग

वायनाड प्रशासन ने जियो टेगिंग का उपयोग किया ताकि पता चलता रहे कि होम क्वारंटाइन के तहत लोग आदेशों का पालन कर रहे हैं। कलक्टर ने कहा, “हमें पता चला कि 50 प्रतिशत लोग अनुपालन नहीं कर रहे हैं। ऐसे में प्रवर्तन सख्त कर दिया गया और वाहनों को जब्त कर लिया गया।  जिला पुलिस अधीक्षक, आर इलंगो ने बताया कि इस विधि में हम चार या पांच दिनों के बाद उल्लंघन करने वालों की पहचान करते हैं और उन पर केस दर्ज करते हैं।

स्थायी नियंत्रण

वायनाड ने लोगों के लिए अपनी सीमाएं खोलीं ताकि उन्हें इलाज में मदद मिल सके। कर्नाटक के उन्नीस और तमिलनाडु के 44 लोग इलाज के लिए 7 अप्रैल तक जिले में आए थे।

सीमाओं पर कड़ी निगरानी

वायनाड में 14 चेकपोस्ट हैं और बॉर्डर क्रॉसिंग की जांच के लिए हर जगह चौकीदार लगाए गए। सीमाओं को सील करने के लिए 15 मार्च को ही धारा 144 लागू कर दी गई। आवश्यक सेवाओं के मामले को छोड़कर राज्य के आठ हॉटस्पॉट जिलों से प्रवेश पर प्रतिबंध लगाई गई।

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अब तक, केवल पांच श्रेणियों के लोगों को जिले में प्रवेश करने की अनुमति है – वे जो मृतक के साथ आते हैं,  मृतक के परिवार से मिलने आते हैं,  अंतिम संस्कार में शामिल होना चाहते हैं, जो सरकारी अस्पतालों में क्वारंटाइन पूरा कर चुके हैं,  जिले के बाहर से कोविड-19 नेगेटिव प्रमाण पत्र के साथ आए हैं या जो अस्पतालों में अन्य बीमारी के लिए इलाज कर रहे हैं।