लॉकडाउन में यहां कर सकते हैं मां दुर्गा के इन मंदिरों का दर्शन, मिलेगा पूरा आशीर्वाद…

नवरात्रि शुरू हो चुकी है। आज के माहौल में लोग सिर्फ मां दुर्गा की आराधना ही कर पा रहे हैं । यह 25मार्च से लेकर 2 अप्रैल तक नवरात्रि है। 9 दिनों तक पूरे विधि विधान से मां दुर्गा की पूजा की जाती है। कुछ भक्त नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक व्रत रखते हैं तो कुछ पहला

नई दिल्ली: नवरात्रि शुरू हो चुकी है। आज के माहौल में लोग सिर्फ मां दुर्गा की आराधना ही कर पा रहे हैं । यह 25मार्च से लेकर 2 अप्रैल तक नवरात्रि है। 9 दिनों तक पूरे विधि विधान से मां दुर्गा की पूजा की जाती है। कुछ भक्त नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक व्रत रखते हैं तो कुछ पहला और आखिरी व्रत रख दुर्गा मां के प्रति अपना प्रेम उजागर करते हैं। हिन्दुओं के लिए नवरात्रि का बहुत महत्व हैं ऐसा माना जाता है कि इस दौरान देवी दुर्गा अपने भक्तों को आशीर्वाद  देने के लिए स्वर्ग से आती हैं।

 

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आज के समय में जब कोरोना वायरस के प्रकोप से पूरी दुनिया त्रस्त हैं ऐसे में माता रानी के आशीर्वाद की जरुरत है। लोग घर में कैद है सिर्फ घर पर ही रहकर मां दुर्गा का ध्यान कर सकते हैं। बाहर जाना मना है, साथ ही माता रानी के सारे मंदिरों पर कोरोना का ताला लग गया है। इसलिए भक्त मां  मंदिरों का दर्शन तो नहीं कर सकते, लेकिन इसके लिए निराश और हताश न हो, आप घर बैठे मां दुर्गा के शक्तिपीठों का दर्शन कर मातारानि से अरदास लगा सकते हैं तो हम आपके लिए लाए कुछ प्रसिद्ध मंदिरों की तस्वीर जिसका दर्शन से पुण्य कमाएं….

जम्मू में स्थित मां वैष्णो देवी के मंदिर में साल भर मां के भक्तों की भीड़ रहती है परंतु नवरात्रि में दर्शनार्थियों की संख्या काफी बढ़ जाती है। यहां माता की गुफा के दर्शन करने पर उनके तीन स्वरूप दिखाई देते हैं ये तीनों रूप पिंडी स्वरूप में हैं और सम्मिलित रूप से वैष्णवी के नाम से जाने जाते हैं।

मां दुर्गा के नौ रूपों की ज्योति इस मंन्दिर में सदैव जलती रहती है। इन नौ ज्योतियों के नाम हैं। महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यावासनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका और अंजीदेवी। यहां मां के नौ रूपों के दर्शन ज्योति रूप में होते हैं, इसलिए इसे जोता वाली का मंदिर भी कहा जाता है।

 

यहां दुर्गा मां, काली माता और भगवान गणेश की प्रतिमा विराजमान है। मंदिर के पास एक गुफा है, जिसे नैना देवी गुफा के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में करीब 20 हज़ार के आसपास चूहे रहते हैं, इसलिए इस मंदिर को चूहों का मंदिर भी कहा जाता है। यहां करणी माता की प्रतिमा स्थापित है जिन्हें मां जगदम्बा का ही अवतार माना गया है।

माता अम्बाजी यह गुजरात का सबसे प्रमुख मंदिर है। मंदिर माता अम्बाजी को समर्पित है। यहां सिर्फ चक्र की पूजा की जाती है। मंदिर में कोई भी प्रतिमा विराजमान नहीं है।

कामाख्या मंदिर यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना है। दस महाविद्या, काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला की पूजा भी कामाख्या मंदिर परिसर में की जाती है।

 

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श्रीसंगी कलिका मंदिर काली मां को समर्पित है और यह कर्नाटक के बेलगाम में स्थित है। यह कर्नाटक का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है और यहां पर मां दुर्गा के काली रूप की पूजा करने का विधान है।

श्री महालक्ष्मी मंदिर विभिन्न शक्ति पीठों में से एक है और महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित है। यहां जो भी भक्‍त अपनी मनोकामना लेकर आता है मां के आशीर्वाद से वह मुराद पूरी हो जाती है। भगवान विष्णु की पत्नी होने के नाते इस मंदिर का नाम माता महालक्ष्मी पड़ा।

पीतांबरा मंदिर

मां त्रिपुर सुंदरी (बिहार)

दक्षिणेश्‍वर काली मंदिर

करणी माता मंदिर

दुर्गा परमेश्‍वरी मंदिर मंगलूरू

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