कोरोना वायरस

अध्ययनों से पता चला है कि वायरस कई दिनों तक कई प्रकार की सतहों पर रह सकता है। हालांकि, ये अधिकतम अवधि केवल सैद्धांतिक हैं क्योंकि उन्हें प्रयोगशाला स्थितियों के तहत दर्ज किया गया है और वास्तविक दुनिया के वातावरण में फिलहाल कुछ स्पष्ट नहीं है।

कोरोना महामारी के इस दौर में भले ही कई लोग संत कोरोना से बीमारी से बचाने की प्रार्थना करने ना जा रहे हों लेकिन क्या पता इसके कारण जाने वाली नौकरियों और आने वाली आर्थिक परेशानियों से रक्षा के लिए लोग फिर से संत कोरोना की प्रार्थना करने लगें।

दरअसल मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में महाराष्ट्र से कामगार आ रहे हैं ये लोग या तो आगे के राज्यों को जा रहे हैं या फिर मध्य प्रदेश के ही अलग अलग जिलों में अपने गाँव लौट रहे हैं। अंदेशा है कि इन प्रवासियों से भी कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है।

कोरोना से संक्रमित मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में हालात दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं। मुंबई में हालत यह हो गई है कि कोविड अस्पतालों में मरीजों के लिए तैयार किए गए सभी साढ़े तीन हजार बेड भर गए हैं।

विशेषज्ञों का भी यही कहना है कि कोविड-19 को लेकर 60 से 85 प्रतिशत आबादी में प्रतिरक्षा आने से ही हर्ड इम्यूनिटी बन पाएगी। हर्ड इम्युनिटी में डिप्थीरिया के मामलों में यह आंकड़ा 75 प्रतिशत, पोलियो में 80 से 85 प्रतिशत और मीजल्स में 95 प्रतिशत है। तो फिर क्या कोरोना में ऐसा हो पाएगा।

केंद्र सरकार की ओर से आरोग्य सेतु ऐप के यूजर्स की जानकारी और डएटा से जुड़े मामले पर नई गाइडलाइन जारी की गई है। कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए विकसित किए गए इस ऐप का कोई भी यूजर आरोग्य सेतु पर उसकी तरफ से दी गई संबंधित जानकारियों को डेटा को डिलीट करने का अनुरोध कर सकता है

कोरोना वायरस देश में तेजी से पैर पसार रहा है। इस महामारी ने अभी तक 65 हजार से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाया है। देश के कई शहरों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस बीच गुजरात में लगातार बढ़ रहे केस ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

देश में कोरोना का पहला केस मिलने के बाद 101 दिन का समय पूरा हो चुका है और पूरा देश इन दिनों एकजुट होकर इस वायरस के खिलाफ संघर्ष में जुटा है।

डॉक्टर गुलेरिया का कहना है कि अस्पतालों ने लॉकडाउन में अपनी तैयारी कर ली है। डॉक्टर्स को प्रशिक्षण दे दिया गया है। पीपीई किट्स, वेंटिलेटर और जरूरी मेडिकल उपकरणों के इंतजाम हुए हैं। कोरोना की जांच बढ़ी है। यह सभी कुछ सकारात्मक है।

वैज्ञानिक म्यूटेशन की प्रक्रिया को सिरे से खारिज भी नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि इसी से पता चलेगा कि कोरोना वायरस का ख़तरा बढ़ रहा है या घट रहा है। प्रतिरोधी क्षमता विकसित होगी या नहीं। वैक्सीन और दवाओं को तैयार करने में जुटे वैज्ञानिकों के लिए इस पर हो रही शोध सकारात्मक नतीजे लाने में मददगार हो सकती है।