कांग्रेस और शिवपाल यादव खुद तो डूबे ही SP-BSP को डूबोने में भी नही रहे पीछे

इस चुनाव ने आरएलडी की तो मानों जान ही निकाल दी है। महागठबंधन के सहारे इस बार दिल्ली ससंद पहुंचने की आस लगाए बैठे अजित सिंह और बेटे जयन्त इस बार भी नही जीत सके। अजित सिंह उम्र के जिस पंडाव पर हैं।

मेरठ: वेस्ट यूपी की २७ लोकसभा सीटों में महागठबंधन को मात्र चार-चार सीटें ही मिल पाई। रहा सवाल कांग्रेस का तो सहारनपुर और आगरा सीट को छोड़कर किसी भी सीट पर कांग्रेस दो अंकों तक वोट प्रतिशत हासिल नहीं कर सकी। उनके दिग्गजों की हालत और भी खराब रही। जनता ने उन्हें पसंद ही नहीं किया, जिसके चलते ज्यादातर की जमानत जब्त हो गई। दूसरी तरफ बीजेपी १९ सीटों पर काबिज होने में सफल रही। इस तरह महागठबंधन के चलते बीजेपी को पांच सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है।

पिछले चुनाव में बीजेपी को २४ सीटेंमिली थी जबकि सपा को तीन सीटेंमिली थी। बसपा और कांग्रेस का खाता तक नही खुल सका था। इस प्रकार देखा जाए तो ताजा चुनाव में महागठबंधन का लाभ बसपा को तो मिला ‌जिसकों इस चुनाव में चार सीटें मिली। सपा को नही मिल सका। चुनाव परिणामों से यह भी साफ है कि कांग्रेस और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) ने बीजेपी का तो नुकसान नही किया अलबत्ता महागठबंधन को नुकसान जरुर पहुंचाया। महागठबंधन और कांग्रेस के अलग अलग लड़ने से उन सीटों पर प्रभाव पड़ा जहां उनके जीतने की संभावना अधिक थी।

ये भी पढ़ें— पनडुब्बियां बनाने के लिये तीन सरकारी कंपनियों ने मिलाया हाथ

वेस्ट यूपी की मेरठ सीट इसका उदाहरण है, जहां से बीजेपी के राजेंद्र अग्रवाल ने बसपा उम्मीदवार हाजी मोहम्मद याक़ूब को 4,729 वोटों से पराजित किया है। राजेंद्र अग्रवाल को 5,86,184 (48.19%) जबकि हाजी याक़ूब को 5,81,455 (47.8%) वोट मिले। यहां से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार हरेंद्र अग्रवाल को 34,479 (2.83%) वोट मिले। यानी कांग्रेस समेत महागठबंधन का वोट प्रतिशत 50.63% था।

इसी तरह फिरोजाबाद में बीजेपी के डॉ.चंद्र सेन जादोन ने समाजवादी पार्टी के यादव परिवार के एक और बड़े नाम अक्षय यादव को 28,781 वोटों से हराया। जादोन को 495819 (46.09%), अक्षय यादव को 467038 (43.41%) वोट मिले। यहां से अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव को 91869 (8.54%) वोट मिले। चुनाव से ठीक पहले पारिवारिक कलह के बाद शिवपाल सिंह ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) बनाई और इसी के टिकट से वो फ़िरोज़ाबाद से खड़े थे।

ये भी पढ़ें— न माया न अखिलेश, असली लाभ मुस्लिम समाज को, यहां जानें यूपी का सियासी गणित

यानी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) समेत महागठबंधन का वोट प्रतिशत 51.95% था। बंदायु में भी कांग्रेस ने महागठबंधन का खेल बिगाड़ा। यहां पर बीजेपी के संघमित्र मौर्य को 511352 (47.30%) वोट मिले। जबकि सपा के धमेन्द्र यादव को 492898(45.59%) वोट मिले। यहां कांग्रेस उम्मीदवार सलीम इकबाल शेरवानी 51947(4.8%) वोट मिले। जीत का अंतर 18,454 रहा। जबकि यहां कांग्रेस समेत महागठबंधन का वोट प्रतिशत 50.39% था।

आरएलडी का भविष्य अंधकारमय

यहां गौरतलब है कि लोकसभा चुनावों से पहले और नतीजों से पहले तक इस बात की चर्चा थी कि अगर यूपी में कांग्रेस सपा-बसपा-रालोद के महागठबंधन में शामिल होती तो नतीजों पर असर पड़ सकता था। महागठबंधन और कांग्रेस के अलग अलग लड़ने से उन सीटों पर प्रभाव पड़ा जहां उनके जीतने की संभावना अधिक थी। वेस्ट यूपी की ही अगर बात करें तो अगर कांग्रेस और शिवपाल यादव का साथ मिलता तो महागठबंधन को तीन और सीटों पर बढ़त हासिल थी। यानी वेस्ट यूपी में 11 सीटें मिल सकती थी।

वेस्ट यूपी में की ग़ाज़ियाबाद सीट से बीजेपी उम्मीदवार वीके सिंह 5 लाख से अधिक अंतर से जीते,जोकि पूरी यूपी में जीत का सबसे बड़ा अंतर है। फतेहपुर सीकरी से कांग्रेस के दिग्गज नेता और अभिनेता से नेता बने राजबब्बर को बीजेपी के राजकुमार चहर ने 4.95 लाख से अधिक मतों से हराया।

ये भी पढ़ें— मुखिया अखिलेश यादव की कमियां जिससे सपा आयी हाशिये पर

वेस्ट यूपी में ज्योतिरादित्य सिंधिया को मैदान में उतारकर चुनावी फतह करने की कांग्रेस की रणनीति सफल नही रही। हालत यह रही की सहारनपुर और आगरा सीट को छोड़कर किसी भी सीट पर कांग्रेस दो अंकों तक वोट प्रतिशत हासिल नहीं कर सकी। मेरठ से पूर्व सीएम बनारसी दास के बेटे हरेंद्र अग्रवाल सिर्फ 34 हजार वोट हासिल कर सके। जो 2014 में कांग्रेस को मिले वोटों से भी कम है। कैराना से पूर्व एमपी और कद्दावर हरेंद्र मलिक 69 हजार वोट पा सके।

पूर्व मंत्री ओमवती तो नगीना से 20 हजार वोटों में ही सिमट गई। बिजनौर से यूपी की सियासत में बड़ा नाम रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी 26 हजार पर ही सिमट गए। नौकरशाह से नेता बनीं प्रीति हरित आगरा से 44 हजार का आकड़ा ही बामुश्किल छू सकीं। मुरादाबाद से मशदूर शायर इमरान प्रतापगढ़ी पर कांग्रेस का दांव लगाना भी ज्यादा कारगर नहीं रहा। वह भी अपनी जमानत नहीं बचा सके। उन्हें सिर्फ 69 हजार वोट मिले।

ये भी पढ़ें— अब क्या करेंगे ओमप्रकाश राजभर, न घर के न घाट के

इस चुनाव ने आरएलडी की तो मानों जान ही निकाल दी है। महागठबंधन के सहारे इस बार दिल्ली ससंद पहुंचने की आस लगाए बैठे अजित सिंह और बेटे जयन्त इस बार भी नही जीत सके। अजित सिंह उम्र के जिस पंडाव पर हैं। उसको देखते हुए उनका राजनीति जीवन अब समाप्त होना माना जा रहा है। रही बात जयन्त की तो उनका राजनीतिक भविष्य भी अंधकारमय दिख रहा है।

वेस्ट यूपी में कुल सीटे-27

चुनाव परिणाम-2019

बीजेपी- 19

सपा – 4

बीएसपी-4

चुनाव परिणाम 2014

बीजेपी- 24

सपा – 3

बीएसपी-0