मनोज तिवारी को हटाने की इनसाइड स्टोरी, इन कारणों से हुई आदेश की ताजपोशी

भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार बड़ा फैसला लेते हुए सांसद मनोज तिवारी को दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया। इसी साल हुए विधानसभा चुनाव में मनोज तिवारी कोई भी कमाल दिखाने में नाकामयाब हुए थे।

अंशुमान तिावरी

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार बड़ा फैसला लेते हुए सांसद मनोज तिवारी को दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया। इसी साल हुए विधानसभा चुनाव में मनोज तिवारी कोई भी कमाल दिखाने में नाकामयाब हुए थे और भाजपा को केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। माना जा रहा है कि उस करारी हार से ही मनोज तिवारी को पद से हटाने की पटकथा तैयार हो गई थी मगर भाजपा चुनाव के तुरंत बाद कोई फैसला नहीं लेना चाहती थी। इसी कारण उन्हें कुछ समय का अभयदान मिल गया। अब कोरोना संकट काल में मनोज तिवारी को हटाकर प्रदेश अध्यक्ष की कमान आदेश गुप्ता को सौंपी गई है।

धुआंधार प्रचार के बावजूद दिल्ली में हारी भाजपा

इस बार दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव को भारतीय जनता पार्टी ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था और पार्टी के तमाम बड़े नेताओं ने दिल्ली में धुआंधार प्रचार करके भाजपा के लिए जीत की सियासी जमीन तैयार करने की कोशिश की थी। पूरे प्रचार की कमान गृह मंत्री अमित शाह ने अपने हाथ में संभाल रखी थी और उन्होंने कई इलाकों में खुद जनसंपर्क की अगुवाई कर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की थी। पार्टी की ओर से अन्य बड़े नेताओं को भी मैदान में उतारा गया और उन्होंने जीतोड़ मेहनत की मगर इसके बावजूद पार्टी को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। केजरीवाल की पार्टी आप ने 70 में से 62 सीटों पर विजय हासिल करते हुए भाजपा को 8 सीटों पर ही संतोष करने के लिए मजबूर कर दिया।

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चुनावी हार के बाद भी उठी थी मांग

दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद ही पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठने लगी थी। ‌पार्टी के नेताओं के बीच यह चर्चा शुरू हो गई थी कि अब पार्टी को एक नए नेतृत्व की जरूरत है। मनोज तिवारी को भी यह आशंका सता रही थी कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाया जा सकता है। यही कारण था कि उन्होंने खुद ही पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश की थी मगर उस समय पार्टी ने उन्हें अध्यक्ष पद से बाहर का रास्ता नहीं दिखाया।

कई मजबूत सीटें भी हार गई भाजपा

मनोज तिवारी को 2016 में पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष पद सौंपा गया था। ‌अध्यक्ष बनने के बाद नगर निगम चुनाव में मनोज तिवारी ने भाजपा को जीत दिलाने में कामयाबी भी हासिल की थी, लेकिन विधानसभा चुनाव के दौरान वे पूरी तरह फेल साबित हुए और भाजपा कई ऐसी सीटें भी हार गई जहां उसकी स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही थी।

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कार्यकर्ताओं का बड़ा वर्ग था नाराज

अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद मनोज तिवारी का पहला ट्विट काफी भावुकता भरा था। उन्होंने दिल्ली की जनता को धन्यवाद देते हुए कहा कि जाने-अनजाने में मुझसे कोई गलती हुई हो तो क्षमा करें। उन्होंने पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों व दिल्लीवासियों के प्रति आभार भी जताया है। इसके साथ ही वे नए प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता को शुभकामनाएं देना भी नहीं भूले। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पार्टी के भीतर ही कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग मनोज तिवारी से नाराज चल रहा था और यही कारण है कि उन्होंने अपनी भूलों के लिए सभी से माफी मांगी है।

नहीं दिला सके पूर्वांचल के लोगों का समर्थन

दिल्ली चुनाव में किसी भी पार्टी को जीत दिलाने में पूर्वांचल के वोटरों की बड़ी भूमिका मानी जाती रही है। मनोज तिवारी को अध्यक्ष बनाए जाने के समय ही यह बात कही गई थी कि भाजपा ने पूर्वांचल के वोटरों को लुभाने के लिए मनोज तिवारी पर बड़ा सियासी दांव खेला है। लोकसभा चुनाव में तो भाजपा पूर्वांचल के वोटरों का समर्थन पाने में कामयाब रही मगर विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा को पूर्वांचल के मतदाताओं का वैसा समर्थन नहीं मिल सका। भाजपा को कई ऐसी सीटों पर भी हार का सामना करना पड़ा जहां पूर्वांचल के मतदाता निर्णायक स्थिति में हैं। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में मनोज तिवारी पार्टी को पूर्वांचल के मतदाताओं का बड़ा समर्थन दिलाने में कामयाब नहीं हो सके। उन्हें अध्यक्ष पद से हटाए जाने के पीछे इसे बड़ा कारण माना जा रहा है।

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धरे रह गए चुनावी जीत के सारे दावे

दिल्ली विधानसभा चुनाव में मतदान के बाद मनोज तिवारी लगातार भाजपा को बड़ी जीत मिलने के दावे कर रहे थे। उनके बड़े-बड़े दावों के कारण पार्टी के बड़े नेता भी काफी हद तक आश्वस्त दिख रहे थे। मनोज तिवारी ने तो मतगणना के दिन भी शुरुआती ट्रेंड में पिछड़ने के बावजूद दावा किया था कि आखिरकार जीत भाजपा को ही मिलेगी मगर उनके सारे दावे धरे के धरे रह गए और भाजपा को भारी शिकस्त झेलनी पड़ी।

रिंकिया के पापा कहकर खूब उड़ा मजाक

नतीजे के बाद सोशल मीडिया पर मनोज तिवारी का खूब मजाक उड़ाया गया। मनोज तिवारी के ही गाए हुए प्रसिद्ध भोजपुरी गीत रिंकिया के पापा के आधार पर कई मजाक उड़ाने वाले मीम्स भी बने। सोशल मीडिया पर लोगों ने उनके बड़े-बड़े दावों को लेकर तीखी टिप्पणियां कीं। इसके बाद से ही उन्हें हटाए जाने की चर्चाएं तेज हो गई थीं मगर कोरोना संकट के कारण उन्हें कुछ दिनों का अभयदान मिल गया।

हाल के कदमों से पैदा हुआ विवाद

मनोज तिवारी ने हाल के दिनों में कुछ ऐसे काम किए थे जिन्हें लेकर विवाद पैदा हुआ था। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने केजरीवाल सरकार के खिलाफ राजघाट पर प्रदर्शन किया था जिसे लेकर उन्हें हिरासत में भी लिया गया था। इसके साथ ही लॉकडाउन के दौरान उनके क्रिकेट खेलने पर भी विवाद पैदा हुआ था। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर उनकी जमकर आलोचना की गई थी। हालांकि मनोज तिवारी ने दावा किया था कि खेल के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह पालन किया गया मगर यह बात किसी के गले नहीं उतरी। जब पूरी दुनिया में खेल की सारी गतिविधियां पूरी ठप पड़ी हैं, मनोज तिवारी का क्रिकेट खेलना किसी को रास नहीं आया। इसके साथ ही वे बीच-बीच में विवादित बयानबाजी भी करते रहे हैं। इसे लेकर भी कई बार सवाल उठते रहे हैं।

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भाजपा ने खेला नए चेहरे पर दांव

भाजपा ने इस बार दिल्ली में एक नए चेहरे पर दांव खेला है। उत्तर प्रदेश में कन्नौज जिले के गुरसहायगंज कस्बे के रहने वाले आदेश कुमार गुप्ता साफ-सुथरी छवि वाले नेता माने जाते रहे हैं। संघ में भी उनकी अच्छी पकड़ बताई जाती है। वे व्यापारी वर्ग से आते हैं और व्यापारियों को भाजपा का कोर वोटर माना जाता रहा है। वे उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर भी रह चुके हैं और वर्तमान में पटेल नगर से पार्षद हैं। इसके साथ ही वे दिल्ली शेल्टर इंप्रूवमेंट बोर्ड के मेंबर भी हैं।

कोरोना संकट काल में सक्रिय रहे हैं आदेश

कोरोना संकट काल के दौरान वे सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहे हैं। इसके साथ ही जरूरतमंद लोगों को भोजन पहुंचाने और उन्हें मदद करने के कामों में भी भी वे बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते रहे हैं। कोरोना काल में उन्होंने केजरीवाल सरकार पर समय-समय पर हमला भी बोला है। माना जा रहा है कि भाजपा ने पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और दिल्ली के लोगों में पैठ बनाने के लिए ही आदेश गुप्ता को अध्यक्ष बनाने का दांव खेला है।

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ताजपोशी में नगर निगम चुनाव भी बड़ा कारण

उनकी निर्विवाद छवि से भी पार्टी को फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। दो साल बाद दिल्ली में नगर निगम का चुनाव होना है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पार्टी ने इसे भी ध्यान में रखकर आदेश गुप्ता को पार्टी की कमान सौंपी है। उनके अध्यक्ष बनने से व्यापारी वर्ग को पार्टी के साथ जोड़े रखने में भी मदद मिलेगी। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद आदेश गुप्ता ने पार्टी के आलाकमान के प्रति आभार जताया है। उन्होंने सबको साथ लेकर चलने की बात कही है।