फर्जीवाड़ा: एक मकान के तीन दावे, LDA की जांच में तीनों फर्जी

लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के उपाध्यक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के समक्ष बताया है कि रुचि खंड, रायबरेली रोड के एक मकान पर जिन तीन लोगों ने मालिकाना हक का दावा किया है, उन तीनों के दावे फर्जी हैं।

लखनऊ: लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के उपाध्यक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के समक्ष बताया है कि रुचि खंड, रायबरेली रोड के एक मकान पर जिन तीन लोगों ने मालिकाना हक का दावा किया है, उन तीनों के दावे फर्जी हैं। जांच में पाया गया है कि यह फर्जीवाड़ा एलडीए के ही कर्मचारियों की मिलीभगत से हुआ है। जिसके बाद एक कर्मचारी को सस्पेंड कर दिया गया है और दो अन्य के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित है। इस पर कोर्ट ने मकान पर दावा करने वाले तीनों लोगों को भी स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं।

यह आदेश जस्टिस एपी साही और जस्टिस एसके सिंह (प्रथम) की खंडपीठ ने मोहन लाल की याचिका पर दिया। कोर्ट ने 7 जुलाई को इस मामले की जांच के आदेश एलडीए वीसी को दिए थे। जांच करते हुए वीसी ने कोर्ट के समक्ष हलफनामा दाखिल कर बताया कि उक्त मकान पर किए जा रहे मालिकाना दावे पूरी तरह से गलत हैं।

यह एक फर्जीवाड़ा है। जिसे एलडीए कर्मियों की ही मिलीभगत से अंजाम दिया गया। इस फर्जीवाड़े में शामिल रहे लोअर डिवीजन क्लर्क मुक्तेश्वर नाथ ओझा को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके साथ ही विवेक श्रीवास्तव और रविकांत श्रीवास्तव नाम के दो और कर्मचारियों पर कार्रवाई प्रस्तावित है। हलफनामे में कहा गया कि उन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी जो मकान पर अपना हक जता रहे हैं।

इस पर कोर्ट ने याची समेत मकान पर मालिकाना हक जताने वाले तीनों लोगों से एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने इसे चौंकाने वाला तथ्य बताया।

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क्या है मामला ?
दरअसल, इस मामले में याची ने रुचि खंड- 2 के एक मकान का बिजली कनेक्शन काटने के विरुद्ध याचिका दाखिल की थी। बिजली विभाग के वकील अमित कुमार द्विवेदी ने कोर्ट को बताया कि मकान पर प्रतिवादी संख्या- 7 उत्तमजीत सिंह ने अपना मालिकाना हक बताते हुए बिजली कनेक्शन काटने का आग्रह किया था।

दावे के पक्ष में उसने रमेश चंद्र गुप्ता की ओर से उसके पक्ष में निष्पादित सेल डीड भी प्रस्तुत की। जबकि रमेश चंद्र गुप्ता के पक्ष में एलडीए के ऑफिस इन चार्ज (सम्पत्ति) शैलेंद्र मल्ल के द्वारा निष्पादित सेल डीड है।

वहीं याची की ओर से भी 4 जुलाई 1983 का अलॉटमेंट लेटर और कुछ पेमेंट रसीद प्रस्तुत की गईं। पूरे मामले पर जवाब देते हुए एलडीए की ओर से कहा गया कि ना तो याची को मकान का कब्जा कभी एलडीए ने हस्तानांतरित किया और ना ही रमेश चंद्र गुप्ता के पक्ष मे सेल डीड निष्पादित की गई है।
लिहाजा प्रतिवादी संख्या- 7 के पक्ष वाली सेल डीड भी अवैध है। एलडीए का कहना है कि पक्षकारों के दावे वाले ट्रांजेक्शंस भी जाली हैं। इस पर कोर्ट ने इसे गंभीर मामला मानते हुए एलडीए वीसी को पूरे मामले की जांच कर 21 जुलाई तक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था।

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