गुजरात चुनाव : गुजरात में जुटी है राजस्थान के नेताओं की फौज

कपिल भट्ट
जयपुर। पूरे देश की निगाहें इस समय गुजरात के विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं। भाजपा किले को बचाने में जुटी है तो कांग्रेस पीएम मोदी के गृह प्रदेश को फतह करना चाहती है। ऐसे में दोनों ही दलों के राजस्थान के नेताओं की फौज गुजरात को फतह कराने के लिए जी-जान से जुटी है। दोनों दलों की सेनाओं में प्रदेश के 200 से ज्यादा नेता शामिल हैं।

वसुंधरा के कई मंत्री लगे हैं चुनाव प्रचार में

इनमें भाजपा की ओर से देवजी पटेल, पीपी चौधरी, ओटाराम देवासी, अमराराम, राजेंद्र राठौड़, अरुण चतुर्वेदी, श्रीचंद पलानी, मदन राठौड़ जैसे वसुंधरा राजे के मंत्रियों के अलावा अन्य प्रमुख नेता शामिल हैं तो कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट, दीपेंद्र शेखावत, शांति धारीवाल, महेश जोशी, रामलाल जाट, प्रमोद जैन भाया सहित अन्य प्रमुख नेता लगे हैं।

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वहीं दोनों ही दलों में राजस्थान के दो नेता बड़ी भूमिका अदा कर रहे हैं। कांग्रेस ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत को उतारा है तो भाजपा ने महासचिव भूपेंद्र यादव को। यह दोनों ही नेता अपने-अपने दलों के गुजरात के प्रभारी हैं। दोनों नेता वहां जौहर दिखा रहे हैं।

गुजरात में काफी संख्या में राजस्थान के लोग

गुजरात और राजस्थान पड़ोसी राज्य हैं। दोनों ही राज्यों के सीमावर्ती इलाकों में बहुत निकटता और समानताएं होने के साथ ही राजस्थान के लोग पूरे गुजरात में व्यवसाय के लिए फैले हुए हैं। लिहाजा गुजरात की कुल 182 विधानसभा सीटों में से करीब दो दर्जन सीटों पर राजस्थान का साफ असर देखा जा रहा है। राजस्थान के लोग मुख्य रूप से गुजरात के सूरत, वडोदरा, अहमदाबाद, गांधीनगर, बनासकांठा आदि शहरों में रहते हैं।

अकेले सूरत नगर में ही करीब 12 लाख राजस्थानी रह रहे हैं। इन शहरों में राजस्थानियों के अच्छे व्यवसाय के कारण उनका स्थानीय गुजरातियों पर भी खासा असर है। गुजरात चुनावों के लिए भाजपा के स्टार प्रचारकों में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का नाम भी शामिल है। कहा जा रहा है कि वे भी चुनाव प्रचार के लिए गुजरात जा सकती हैं। वहीं भाजपा ने जातिगत समीकरणों के हिसाब से राजस्थान के मंत्रियों को गुजरात में चुनाव प्रचार करने के लिए भेजा है।

कांग्रेस में गहलोत को मिली है प्रमुख भूमिका

इसके साथ ही राजस्थान के दो नेताओं कांग्रेस के अशोक गहलोत और भाजपा के भूपेंद्र याादव की गुजरात चुनावों में अहम सियासी भूमिका है। कांग्रेस पार्टी के गुजरात राज्य प्रभारी के रूप में अशोक गहलोत ने जहां पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश फूंका हैं वहीं कुछ समय पहले हुए राज्यसभा चुनाव में विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अहमद पटेल को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। हार्दिक, अल्पेश व जिग्नेश को पार्टी की तरफ मोडऩे में भी गहलोत की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है।

सोनिया गांधी, राहुल गांधी व मनमोहन सिंह के बाद कांग्रेस के स्टार प्रचारकों में गहलोत का चौथा नाम है। वहीं उन्होने राजस्थान से बड़े और अपने विश्वस्त नेताओं को गुजरात चुनावों में उतार रखा है। गहलोत दो बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहने के साथ ही संगठन में प्रमुख पदों पर रहे हैं। वे रणनीति बनाने में माहिर होने के साथ ही निर्णय लेने में सक्षम हैं। पंजाब चुनाव में भी गहलोत बेहतर परिणाम दे चुके हैं। वे सोनिया गांधी और अहमद पटेल के विश्वस्त हैं।

मैदानी स्तर पर जुटे हैं भूपेन्द्र यादव

दूसरी ओर भूपेंद्र यादव ने चुनाव से पहले अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को सक्रिय बनाने के कार्यक्रम बनाए और मैदानी स्तर पर काम कराया। वहीं राजस्थानियों के बाहुल्य वाले इलाकों में राजस्थान से मंत्री-पदाधिकारी और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को गुजरात चुनाव में लगाया। बूथ मैनेजमेंट पर उनका जोर है। वहीं कांग्रेस से बड़े नेता शंकरसिंह वाघेला को तोडऩे में भी उनकी अहम भूमिका बताई जा रही है। वे एंटी इनकमबेंसी के माहौल को खत्म करने के लिए केंद्र व राज्य की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने के टास्क पर काम कर रहे हैं। यादव अच्छे वक्ता व सियासी आंकड़ों के विश्लेषण में माहिर हैं। उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व का भरोसा जीता। वे अमित शाह और अरुण जेटली के करीबी हैं।

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