महाराष्ट्र की राजनीति पर बोले- बीजेपी के दिग्गज, आखिरी ओवर में तय होगी हार जीत

महाराष्ट्र में किसी पार्टी की सरकार नहीं बनी है। राजनीति दांवपेच के बीच वहां राष्ट्रपति शासन लग गया है। बीजेपी इस मामले पर जरुर शांत बैठी है, लेकिन वह भी अवसर की ताक में है। शिवसेना सत्ता बनाने के लिए जद्दोजहद में लगी है, लेकिन अभी तक स्थिति साफ नहीं है।

जयपुर : महाराष्ट्र में किसी पार्टी की सरकार नहीं बनी है। राजनीति दांवपेच के बीच वहां राष्ट्रपति शासन लग गया है। बीजेपी इस मामले पर जरुर शांत बैठी है, लेकिन वह भी अवसर की ताक में है। शिवसेना सत्ता बनाने के लिए जद्दोजहद में लगी है, लेकिन अभी तक स्थिति साफ नहीं है। इधर महाराष्ट्र की राजनीति पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता व केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा- मुझे महाराष्ट्र की राजनीति की पूरी जानकारी अभी नहीं है। क्रिकेट और राजनीति में कुछ भी संभव है।आज मैच हार रहे हैं, लेकिन कल परिणाम एकदम विपरीत हो सकता है।

महाराष्ट्र में गैर-भाजपा सरकार बनती है तो मुंबई में जारी परियोजनाओं का क्या होगा?  इसके जवाब में गडकरी ने कहा कि सरकार बदलती है, लेकिन परियोजनाएं जारी रहती हैं। सरकार किसी की भी बने सकारात्मक नीतियों का समर्थन होगा।

 

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इधर शिवसेना के रवैये से बौखलाएं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य की राजनीति पर कहा कि नहीं लगता कि वहां शिवसेना सरकार बना पाएगी और  वहां सरकार बन भी जाएं तो वो 6 महीने से ज्यादा नहीं चल पाएगी। भले कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना महाराष्ट्र में सरकार बनाने की ओर कदम बढ़ा रही हैं। लेकिन राज्य में बीजेपी सरकार के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

लेकिन कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना की ओर से सरकार बनाने की कोशिश जारी है गुरुवार को तीनों पार्टियों के नेताओं ने बैठक की। इसके बाद एकसाथ तीनों ही पार्टियों के नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न्यूनतम साझा कार्यक्रम के बारे में बताया। सरकार गठन के बाद लागू किया जाएगा।

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बीजेपी के राज्य अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने कहा-‘शिवसेना ने जनादेश का अपमान किया है..अगर शिवसेना, कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सहयोग से सरकार बनाने की स्थिति में है तो हम उन्हें अपनी शुभकामनाएं देते हैं। इधर राज्यपाल  के बुलाने पर बीजेपी ने रविवार को स्वीकार किया था कि वह जनादेश मिलने के बावजूद महाराष्ट्र में सरकार बनाने में असमर्थ है। भाजपा द्वारा सरकार बनाने में असमर्थता जताने के बाद राज्यपाल कोश्यारी ने शिवसेना को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। लेकिन शिवसेना ने बहुमत जुटाने के लिए निर्धारित समय से ज्यादा समय की मांग की. राज्यपाल ने शिवसेना की मांग को ठुकराते हुए एनसीपी को सरकार बनाने का न्योता दिया।

फिलहाल राज्य में राष्ट्रपति शासन है। अब  भी किसी  पार्टी या गठबंधन की ओर से कोई विकल्प नहीं आया है। ऐसे में देखना होगा कि राज्य की राजनीति कौन सी दिशा लेती है। क्या क्रिकेट की तरह पाला बीजेपी मे जाता है या फिर मैच फाइनल होकर तीनों पार्टियां न्यूनतम साझा कार्यक्रम चलाती है।