Lok Sabha Election 2019: मेनका गांधी इस बार सीट बदलने को तैयार,हरियाणा से लड़ सकती हैं चुनाव

लोकसभा चुनाव की तिथियों की घोषणा के बाद से ही देश में चुनावी हलचल तेज हो गई है। अब खबर है कि केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी अपनी परंपरागत पीलीभीत लोकसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ना चाहती हैं। तो वहीं उत्तर प्रदेश में बीजेपी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पार्टी कई वर्तमान सांसदों के टिकट काटने जा रही है।

मेनका गांधी फ़ाइल फोटो

मेनका गांधी फ़ाइल फोटो

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव की तिथियों की घोषणा के बाद से ही देश में चुनावी हलचल तेज हो गई है। अब खबर है कि केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी अपनी परंपरागत पीलीभीत लोकसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ना चाहती हैं। तो वहीं उत्तर प्रदेश में बीजेपी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पार्टी कई वर्तमान सांसदों के टिकट काटने जा रही है।

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सूत्रों के हवाले से खबर मिल रही है कि इस बार केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी हरियाणा से लोकसभा का चुनाव लड़ सकती हैं। मेनका अभी तक उत्तर प्रदेश की पीलीभीत से चुनाव लड़ती रही हैं। माना जा रही है कि बीजेपी इस बार मेनका गांधी को करनाल या कुरुक्षेत्र से टिकट दे सकती है। सूत्रों की मानें तो मेनका गांधी कुरुक्षेत्र से चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हैं। वर्तमान में एक अखबार के मालिक अश्वनी चोपड़ा सांसद हैं और पिछले कई दिनों से अस्वस्थ चल रहे हैं हालांकि मेनका गांधी की करनाल सीट से दावेदारी को लेकर हरियाणा बीजेपी में अभी तक सहमति नहीं बनी है। इसके साथ ही उनके मुख्यमंत्री मनोहरलाल से तीखे मतभेद भी हैं।

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दरअसल चर्चा ये भी है कि मेनका की पीलीभीत सीट से वरुण गांधी को इस बार चुनाव लड़ाया जा सकता है। वरुण गांधी फिलहाल यूपी के सुल्तानपुर से सांसद हैं और 2009 में वो पीलीभीत से ही पहली बार सांसद बने थे। फिलहाल मेनका और वरुण गांधी की दावेदारी पर अंतिम फैसला पीएम मोदी और अमित शाह करेंगे।

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मेनका को पीलीभीत सीट से साल 2014 के लोकसभा चुनाव में 546934 (52.06) वोटे मिला थीं। दूसरे नंबर पर रही समाजवादी पार्टी को 239882 (22.83) तीसरे नंबर रही बीएसपी 196294 वोट मिले थे। कांग्रेस को यहां पर चौथे पर नंबर पर थी। इस बार उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के बीच गठबंधन हुआ और इस समझौते के तहत समाजवादी पार्टी इस सीट से अपना प्रत्याशी उतारेगी और बीएसपी को उसे समर्थन मिलेगा। हालांकि बीजेपी को पिछली बार जितनी वोटें मिली थीं उस लिहाज से वह सपा और बीएसपी के मिल जाने के बाद भी काफी मजबूत स्थिति में है।