अध्यात्म

देश में सात ऐसे मंदिर है, जहाँ पुरुषों के प्रवेश पर रोक है। हालांकि, इन मंदिरों में सबरीमाला की तरह नियम नहीं हैं, लेकिन मान्यता यही कहती है, कि पुरुषों को सिर्फ मंदिर के आंगन तक ही जाने की अनुमति हैं। मूर्ति के पास तक नहीं।

जहां यह सैलानी अखाड़ों के शाही स्नान में शामिल हो रहे हैं। इसके लिए बाकायदा पारम्परिक ढंग से नागा संन्यासियों की तरह भस्मी लगाकर चेहरे को ऊर्जावान किया है। इसी प्रकार भारी संख्या में विदेशी सैलानी आध्यात्मिकता को आत्मसात कर रहे हैं।

कुंभ नगर में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के अदभुत संगम में न केवल श्रद्धालु बल्कि इस दिन देवता भी संगम में स्नान को आते हैं। इस दिन पुण्य की डुबकी लगाने के बाद दान का भी विशेष महत्व है। इस दिन अन्न, वस्त्र , फल आदि का दान करना चाहिए।

ये मंदिर आज भी अपने आदि रूप में विद्यमान है। सनातन धर्म की मान्यतानुसार किसी भी कार्य के आरम्भ में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। विघ्न विनाशक गणपति की आराधना का प्रथम केंद्र होने के चलते इस मंदिर का विशेष महत्व है और यहां साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है।

जयपुर : कुंभ स्नान में अब कुछ दिन शेष रह गए है।  हिन्दू धर्म में कुंभ पर्व को महत्वपूर्ण पर्वों में से एक माना जाता है। कुंभ के दौरान, लाखों-करोड़ों श्रद्धालु गंगा स्नान करने आते हैं। गंगा स्नान कुंभ पर्व स्थल हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक है। इन सभी में प्रत्येक स्थान पर हर बारह …

प्रयागराज कुंभ मेले की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। इस आध्यात्मिक महापर्व से करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार तो होता ही है, उससे जुड़े अर्थतंत्र से लाखों लोगों के भौतिक जीवन में भी उजास आता है। कुंभ मेला प्रयागराज और आसपास के अनेक जिलों के विकास की संजीवनी बनकर आता है।

जयपुर: कुंभ शुरु होने वाला है। और इसमें साधुओं की लंबी कतार देखने को मिलती है।  खासकरनागा साधूओ की। इन साधुओं में पुरुषों के साथ महिला नागा साधू भी होती है। बहुत कम लोग जानते हैं कि महिला नागा साधु कैसे बनती है। महिला नागा साधू बनने के लिए 6 से 12 साल तक ब्रम्हचर्य …

लखनऊ:  माघ यानी भारतीय संवत्सर का ग्यारहवां चंद्रमास व दसवां सौरमास। दरअसल मघा नक्षत्र युक्त पूर्णिमा होने के कारण यह महीना माघ का महीना कहलाता है। मकर संक्रांति से कुंभ संक्रांति तक पूरा एक महीना माघ महीना कहलाता है। वैसे तो इस मास का हर दिन पर्व के समान जाता है। लेकिन कुछ खास दिनों …

लखनऊ: धर्मग्रंथों में तीर्थों की अलौकिक महिमा और उनके पुण्य प्रभावों का विशद वर्णन मिलता है। हमारे तत्वदर्शी ऋषियों, मनीषियों का कहना है कि जैसे काल विशेष या स्थान विशेष में किये गये किसी भी कार्य का प्रभाव और महत्व बढ़ जाता हैए उसी तरह विभिन्न काल योगों में विशिष्ट तीर्थों में होने वाले धार्मिक …