चुनाव

कांग्रेस ने उपचुनाव में 11 सीटों में से लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 6.25 फीसदी वोट मिला था। उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी ने आंदोलनों और संघर्षों के दम पर लगभग 12.80 फीसदी वोट पाने में कामयाब रही।

इस बार हुए 11 विधानसभा सीटों के चुनाव परिणाम ही क्यो न हों। भाजपा के लिए अपेक्षा के विपरीत मिले उपचुनाव के परिणामों की वजह जो भी हों पर इस सताधारी दल भाजपा के ढाई साल के कार्यकाल का मूल्यांकन ही कहा जाएगा।

उत्तर प्रदेश की 11 विधानसभा सीटों के उपचुनाव के नतीजे बीजेपी समेत अन्य राजनीतिक दलों को कई संकेत दे गए। जहां चुनाव परिणाम में बीजेपी की सीटें घटने से संगठन और सरकार के लिए नई चुनौती पेश हुई।

इस ट्वीट में कुछ रहस्य छुपा हुआ है, कहीं न कहीं इस ट्वीट से फणनवीस की सरकार परअमित शाह ने कुछ रिएक्शन नहीं दिया है। तो देखना होगा कि आखिर दोनों राज्यों का बागडोर आखिर किनको मिलती है।

नीतीश को दरौंदा छोडक़र सभी सीटों पर जीतने की उम्मीद थी। लेकिन जीत एक भी सीट पर नहीं मिली। इसलिए ये परिणाम नीतीश के लिए करारा झटका है।

माना जा रहा है कि मंत्रियों की जनता से दूरी उनकी हार का प्रमुख कारण रही। मंत्री बनने के बाद वे जनता से पूरी तरह कटे रहे। ऐसे में जनता ने चुनाव में उन्हें सबक सिखा दिया।

पवार की पार्टी ने पश्चिम महाराष्ट्र की 66 सीटों पर पिछली बार की तुलना में बढिय़ा प्रदर्शन किया। यह क्षेत्र राकांपा का गढ़ माना जाता है लेकिन 2014 में उसने मात्र 18 सीटें यहां जीती थीं। इस बार 27 सीटें उसकी झोली में गईं हैं जबकि भाजपा का स्कोर करीब आधा ही रह गया।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपे ज्ञापन में कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि सहारनपुर के जिला प्रशासन ने गंगोह सीट के लिए हो रहे उपचुनाव की मतगणना में धांधली करवाई।

सूत्रों के मुताबिक जेजेपी का कहना है कि हम कांग्रेस को समर्थन नहीं देंगे। बल्कि भाजपा को दे सकते हैं। वहीं खबर है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हरियाणा के राज्यपाल से मिलने का समय मांग लिया है।

जेजेपी को दस सीटें मिलती दिख रही हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों दुष्यंत का समर्थन पाने की कोशिश में हैं। ऐसे में सबकी नजरें उन पर जाकर टिक गई हैं। यहां तक कि उनके सीएम तक बनने का अनुमान लगाया जा रहा है।