मुन्ना बजरंगी ऐसे करता था क्रूरता से हत्या, पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों की कांप जाती थी रुह

लखनऊ: बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के आरोपी माफिया मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या कर दी गई है। कई खदरदारी नेताओं से उसके बेहद ही नजदीकी रिश्ते थे। उसे मुख्तार अंसारी का भी बेहद ही करीबी माना जाता था।

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कभी पूर्वांचल में खौफ और गैंगवार का सबसे बड़ा पर्याय रहा मुन्ना बजरंगी बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के मामले में जेल में बंद और उसपर दर्जनों मुकदमे हत्या, लूट के दर्ज थे। बता दें, कृष्णानंद राय को मुन्ना ने 100 गोलियां मारी थीं। वह दुश्मनों की इतनी क्रूरता से हत्या करता था कि पोस्टममार्टम से पहले डाक्टरों की रूह कांप जाया करती थी।

पिता चाहते थे बेटा बने इंजीनियर-डॉक्टर

मुन्ना बजरंगी के नाम से फेमस इस माफिया का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है, जिसका जन्म 1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था। मुन्ना के पिता पारसनाथ सिंह ने उसके लिए एक सपना देखा था। वो चाहते थे कि उनका बेटा इंजीनियर या डॉक्टर बने लेकिन ऐसा हुआ ही नहीं। मुन्ना ने सिर्फ पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई की थी।

17 साल की उम्र में दर्ज हो गया था पहला मुकदमा

मुन्ना बजरंगी छोटी उम्र से ही मारधाड़ वाली फ़िल्में देखा करता था। रील लाइफ को वह रियल लाइफ में जीना चाहता था।। यही वजह थी कि 17 साल की नाबालिग उम्र में ही उसके खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। जौनपुर के सुरेही थाना में उसके खिलाफ मारपीट और अवैध असलहा रखने का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद मुन्ना ने कभी पलटकर नहीं देखा।

ऐसे बना सुपारी किलर

मुन्ना के पिता उसे बड़ा आदमी बनाना चाहते थे लेकिन उसका कभी भी पढ़ने लिखने में मन नहीं लगता था। मगर वह बड़ा आदमी जरूर बनना चाहता था। इसलिए उसने बड़ा आदमी बनने के लिए जुर्म का जुर्म का रास्ता चुना। इसी दौरान उसे जौनपुर के स्थानीय दबंग माफिया गजराज सिंह का संरक्षण हासिल हो गया।

मुन्ना अब उसके लिए काम करने लगा था। वह सुपारी किलर बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका था। 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी। इसके बाद उसने गजराज के इशारे पर ही जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करके पूर्वांचल में अपना दम दिखाया। उसके बाद उसने कई लोगों की जान ली।

सुपारी लेकर दुश्मन क्रूरता से करता था हत्या

मुन्ना बजरंगी की पहचान एक ऐसे सुपारी किलर के तौर पर होती थी। जो सुपारी लेकर दुश्मन की क्रूरता से हत्या करता था। उसके हत्या करने के तरीके से लोगों में दहशत पैदा होती थी। वह जब भी किसी की हत्या करता था उसे कम से कम 50 से 60 गोली जरूर मारता था। ताकि जब भी लोगों को पता चले तो उसके नाम से ही दहशत पैदा। उसने जुर्म की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ने के लिए अपना नाम पैदा करने की कोशिश की। धीरे –धीरे वह रंगदारी के अलावा कई अन्य आपराधिक काम भी करने लगा था।

पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों की कांप जाती थी रूह

मुन्ना बजंरगी द्वारा हत्या करने के बाद जब भी कोई बॉडी पोस्टमार्टम हाउस लाई जाती थी तो डाक्टर शव की हालत देखकर कई बार सोच में पड़ जाते थे। वे मुन्ना बजंरगी द्वारा क्रूरता से हत्या करने के तरीके से काफी हैरान भी थे। उनका मानना था कि जब किसी व्यक्ति की मौत एक गोली लगने से भी हो सकती है तो उसे 50 -60 या फिर सौ गोली क्यों मारी गई?

ये उनके लिए भी एक परेशान करने वाली बात थी। अक्सर पोस्टमार्टम के टाइम डाक्टरों की रूह कांप जाया करती थी। ठीक ऐसा ही कृष्णानन्द राय हत्याकांड के पोस्टमार्टम के टाइम भी हुआ था। कृष्णानन्द राय समेत उनके काफिले पर मुन्ना ने हमला कर दिया था। हर आदमी को कम से कम 50 से 60 गोलियां मारी गई थी।