राहुल ने कतरे PK के पर, काबिल उम्मीदवार छांटने की प्रक्रिया से किया अलग

Published by August 31, 2016 | 5:15 am
राहुल और पीके

नई दिल्लीः कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी के यूपी और पंजाब में पोल स्ट्रैटेजिस्ट प्रशांत किशोर यानी पीके के पर कतर दिए हैं। अब पीके काबिल उम्मीदवार नहीं छांट सकेंगे। संकेत ये भी हैं कि उनके वित्तीय अधिकारों में कटौती समेत कई काम से भी उनको मुक्त कर दिया गया है। बता दें कि कांग्रेस आलाकमान ने पीके को यूपी में कांग्रेस को पुनर्जीवित करने का जिम्मा सौंपा था, लेकिन अब कुछ मामलों में वह हाशिए पर कर दिए गए हैं।

धीरे-धीरे अधिकारों में हुई कटौती
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक राहुल ने यूपी कांग्रेस प्रभारी गुलाम नबी आजाद को फ्री हैंड देने के लिए पीके के अधिकारों में धीरे-धीरे कटौती का फैसला किया। बता दें कि पीके ने बिहार में नीतीश-लालू की पार्टियों को सत्ता तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। नारे गढ़ने और बूथ प्रबंधन का काम भी किया था। कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने कहा कि यूपी की राजनीति बिहार से अलग। उसे बिहार के पैरामीटर पर नहीं चलाया जा सकता।

माहौल न बना पाना बड़ी वजह
बताया जा रहा है कि छह महीने पहले यूपी में कांग्रेस के प्रचार की कमान संभालने वाले प्रशांत किशोर पार्टी के पक्ष में माहौल नहीं बना सके। पार्टी की बस यात्राओं से भी कुछ नहीं हुआ। ऐसे में उनके प्रयोग और सलाह किसी काम के नहीं दिखे और इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा है। इसके अलावा निचले स्तर तक ये संदेश पहुंचा कि पीके की टीम ही टिकट तय करेगी। इससे भी कार्यकर्ता रोष में दिखे। कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस कॉरपोरेट कल्चर से तो यूपी में पार्टी डूब जाएगी। घोर निराशा उनमें छा गई और बीएसपी, सपा और बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस अभी से बाहर दिखने लगी।

पीके बना रहे जवाबी रणनीति
इस बीच, खबर ये भी है कि प्रशांत किशोर खुद के खिलाफ चल रही मुहिम की धार को कुंद करने में जुट गए हैं। इसके लिए वह जवाबी रणनीति बना रहे हैं। यूपी कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने पीके का बचाव किया है। इस नेता का कहना है कि प्रशांत के खिलाफ शुरू से ही अफवाहें चलाई जा रही हैं। नेता ने बताया कि प्रशांत किशोर को अलग-थलग करने की खबरें गलत और भ्रामक प्रचार का हिस्सा हैं।

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यूपी में कांग्रेस के लिए काम करने से पहले प्रशांत किशोर बिहार में नीतीश कुमार के लिए काम कर  रहे थे। बिहार में नीतीश कुमार की जीत के पीछे प्रशांत किशोर का बड़ा हाथ माना जाता है। लेकिन इस बीच प्रशांत किशोर पर आरोप लगा है कि उन्होंने बिहार सरकार से नौ करोड़ रुपए तो ले लिए, लेकिन विजन डॉक्यूमेंट नहीं बनाया। बीजेपी का कहना है कि उन्हें ये पैसा विजन डॉक्यूमेंट बनाने के लिए दिया गया था। हालांकि,  प्रशांत किशोर ने आरोपों को गलत बताया है।

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