UP के 2 सरकारी विभागों में चल रही है वर्चस्व की जंग, दम तोड़ रहा विकास

लखनऊ: राज्य में अब तक नेताओं या अधिकारियों के बीच ही वर्चस्व को लेकर जंग छिड़ने की खबरें आती रही हैं। लेकिन अब प्रदेश के दो सरकारी विभागों में अधिकारों को लेकर तलवार खिंची हुई है और तीर छोड़े जा रहे हैं। ये विभाग हैं पंचायती राज और ग्राम्य विकास विभाग।
इस जंग में अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक आंदोलन के मूड मे हैं। अब जब विभागीय अधिकारी और कर्मचारी अपने हक को लेकर आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं और आक्रोश की आग सुलग रही है, तो इसका असर विकास कामों पर पड़ना भी तय माना जा रहा है।

क्या है विवाद ?
-दरअसल, बीते 23 मई को सीएम अखिलेश यादव को ब्लॉक प्रमुखों ने एक प्रस्ताव दिया था।
-कहा गया कि पंचायतीराज के तहत आने वाले 14वें वित्त आयोग की धनराशि के एकाउंट और कर्मचारियों पर ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों का नियंत्रण हो।
-प्रस्ताव में पंचायतीराज विभाग और ग्राम्य विकास विभाग के विलय पर भी जोर दिया गया है।
-इस प्रस्ताव को लेकर ही दोनों विभाग आमने सामने आ गए हैं।

क्या कहते हैं पंचायतराज विभाग के कर्मचारी
-पंचायतीराज सेवा परिषद के पूर्णेन्दु दीक्षित का कहना है कि प्रदेश में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है कि एक विभाग का दूसरे विभाग के कार्य और कर्मचारियों पर नियंत्रण हो। दो विभागों के बीच समन्वय हो सकता है लेकिन नियंत्रण नहीं।
-अब तक ग्राम पंचायत में सचिव का काम देखने वाले वीडीओ को सेवा परिषद ने ग्राम्य विकास विभाग में भेजने की मांग की है।
-प्रस्ताव के विरोध और अपनी मांग को लेकर पंचायती राज विभाग के लोग 10 जून को धरना प्रदर्शन करेंगे।
-अगर मांगें न मानी गईं तो 17 जून को प्रदेश स्तर पर धरना प्रदर्शन लक्ष्मण मेला मैदान में होगा।
-इसी दिन मांगों को लेकर सीएम आवास भी घेरने की योजना है।

समन्वय की भूमिका में है ग्राम्य विकास
-प्रादेशिक विकास सेवा संगठन की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह का कहना है कि ग्राम्य विकास विभाग समन्वय की भूमिका में है।
-उन्होंने कहा कि नियंत्रण गलत शब्द है। ब्लाक एक सिंगल विंडो है। हम लोग चाहते हैं कि समन्वय हो।

gramya vikas-war to dominate
एक प्रस्ताव के बाद आंदोलन की तैयारी

बीडीओ के पास हैं ये अधिकार
-ग्राम्य विकास विभाग के खण्ड विकास अधिकारी (बीडीओ) को जो अधिकार दिए गए हैं,उनमें ग्राम पंचायत अधिकारियों के नियंत्रण का अधिकार है।
-एडीओ पंचायत के आकस्मिक अवकाश स्वीकृत करने का भी अधिकार है।
-वार्षिक चरित्र टिप्प्णी पर रिपोर्ट लगाने का भी अधिकार दिया गया है।
-इसके अलावा क्षेत्र पंचायत अधिनियम में क्षेत्र पंचायतों में मुख्य कार्यपालक अधिकारी का अधिकार है।

1987 के पहले हुआ करता था सामुदायिक विकास विभाग
-दरअसल, वर्ष 1987 के पहले सामुदायिक विकास विभाग हुआ करता था।
-इसमें पंचायतीराज विभाग, ग्राम्य विकास और अन्य विभागों के अधिकारी व कर्मचारी पदोन्नति पाकर और सीधी भर्मी से ए, बी और सी वर्ग के अधिकारी हुआ करते थे।
-1987 के बाद यह स्पष्ट हुआ कि पंचायतीराज और ग्राम्य विकास विभाग अलग-अलग हैं।

पंचायत संगठनों का ग्राम्य विकास पर आरोप
-पंचायतीराज विभाग के काम ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी करते हैं।
-उन पर विभाग का कोई नियंत्रण नहीं है।
-सभी अधिकार एक पक्षीय होकर ग्राम्य विकास विभाग के पास हैं।
-पंचायत कर्मी ग्राम्य विकास के अधिकारी और कर्मचारियों के षडयंत्रों से परेशान हैं ।