साइरस मिस्त्री मामला: चेयरमैन पद के लिए घमासान, टाटा संस कंपनी पहुंची कोर्ट 

दिल्ली: टाटा संस (Tata Sons) के छठे चेयरमैन साइरस मिस्त्री (Cyrus Mistry) एक बार फिर चर्चा में हैं। दरअसल, नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने दिसंबर में साइरस मिस्त्री के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें दोबारा टाटा सन्स का चेयरमैन नियुक्त करने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ अब टाटा संस कंपनी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गयी है। बता दें कि साइरस मिस्त्री को नाटकीय ढंग से कंपनी के चेयरमैन पद से हटा दिया गया था, जिसके बाद से एन चंद्रशेखर को चेयरमैन बना दिया गया।

टाटा संस ने एनसीएलएटी के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में की अपील:

भारत की बड़ी कम्पनियों में से एक टाटा संस के चेयरमैन पद के लिए घमासान जारी है। रतन टाटा के रिटायर होने के बाद 2012 में उनकी जगह साइरस मिस्त्री ने ली थी। लेकिन साल 2016 में साइरस मिस्त्री को नाटकीय ढंग से उनके पद से हटा दिया गया था। उसके बाद से कंपनी में विवाद बना हुआ है। एक बार फिर ये मामला सुर्ख़ियों में हैं।

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एनसीएलएटी ने साइरस मिस्त्री को दोबारा चेयरमैन बनाने का दिया आदेश:

मामला नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) तक पंहुच गया। ट्रिब्यूनल ने 18 दिसंबर 2019 को साइरस मिस्त्री के पक्ष में फैसला देते हुए उन्हें पद पर बहाल करने का ऐलान दिया। इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति को अवैध घोषित कर दिया। ट्रिब्यूनल ने साइरस मिस्त्री को हटाने के फैसले को गलत ठहराया।

 

ट्रिब्यूनल ने एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति को घोषित किया अवैध

बता दें कि कंपनी से निकाले जाने के दो महीने बाद मिस्त्री की ओर से उनके परिवार की दो इन्वेस्टमेंट कंपनियों- साइरस इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड और स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्प ने टाटा सन्स के फैसले को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की मुंबई बेंच में चुनौती दी थी। इन कंपनियों की दलील थी कि मिस्त्री को हटाने का फैसला कंपनीज एक्ट के नियमों के मुताबिक नहीं था, लेकिन जुलाई 2018 में एनसीएलटी ने दावे खारिज कर दिए और मिस्त्री हार गये।

बाद में एनसीएलटी के फैसले के खिलाफ मिस्त्री ने खुद अपीलेट ट्रिब्यूनल में अपील की। ट्रिब्यूनल ने अपना फैसला सुनाते हुए टाटा सन्स को अपील के लिए 4 हफ्ते का वक्त भी दिया था। अब कंपनी ने उनके फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी।

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