बीजेपी को घोषणा पत्र की जगह माफीनामा जारी करना चाहिए: ललितेश पति त्रिपाठी

सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी ललितेश पति त्रिपाठी के बीजेपी के चुनावी घोषणापत्र पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि जिसका नाम संकल्प पत्र रखा गया है, लेकिन देश की जनता यह उम्मीद कर रही है कि बीजेपी को पिछले पांच साल में किए गए वायदों को पूरा ना कर पाने के लिए माफीनामा जारी करना चाहिए।

मिर्जापुर: सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी ललितेश पति त्रिपाठी के बीजेपी के चुनावी घोषणापत्र पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि जिसका नाम संकल्प पत्र रखा गया है, लेकिन देश की जनता यह उम्मीद कर रही है कि बीजेपी को पिछले पांच साल में किए गए वायदों को पूरा ना कर पाने के लिए माफीनामा जारी करना चाहिए।

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बीजेपी को देश से माफी मांगनी चाहिए कि उन्हें जो पांच साल के लिए स्पष्ट बहुमत की सरकार मिली उस अवसर को उन्होंने गंवा दिया है और पिछले घोषणापत्र का एक भी वायदा पूरा नहीं किया गया। ललितेश पति त्रिपाठी जो कि स्वयं कांग्रेस घोषणापत्र समिति के सदस्य और मिर्जापुर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी भी है।

उन्होंने बीजेपी के घोषणापत्र का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले घोषणापत्र में जो वायदे किए गए थे वो कितना पूरा हो पाया इसका जिक्र तक नहीं किया गया। नौजवानों के सामने रोजगार का संकट है, लेकिन रोजगार का जिक्र तक नहीं किया गया, नोटबंदी, जिसे गाजे-बाजे के साथ देश की तस्वीर बदलने के लिए लाया गया था। उससे कितना फायदा मिला इसका भी जिक्र नहीं किया गया। जीएसटी से अर्थव्यवस्था को क्या लाभ मिला इस पर भी मौन धारण कर लिया गया। इस लिहाज से बीजेपी के घोषणापत्र में रोजगार, नोटबंदी, जीएसटी, कालाधन जैसे शब्दों का जिक्र तक नहीं है।

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पिछले कुछ सालों से बीजेपी यह दावा कर रही है कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी। अब यह बीजेपी के घोषणापत्र में भी आ गया है, लेकिन देश के बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों का मानना है कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए 12 से 15 फीसदी की वृद्धि दर की आवश्यकता होगी, लेकिन मोदी सरकार के पांच साल में औसत कृषि वृद्धि दर महज 2 फीसदी ही रही।

साल 2014 के घोषणापत्र में बीजेपी ने 60 साल के ऊपर की उम्र वाले किसानों के लिए कई तरह के कल्याणकारी कार्यक्रम चलाने की बात कही थी। अब 2019 के घोषणापत्र में वयोवृद्ध किसानों को पेंशन देने की बात कही जा रही है। जिन्होंने पिछले पांच साल में किसानों की तरफ पलटकर नहीं देखा उनसे किसान किस तरह की उम्मीद कर सकते हैं।

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बीजेपी के साल 2014 के घोषणापत्र में कहा गया था कि सरकार बनने पर साल 2019 तक 99 सिंचाई परियोजनाएं पूरी की जाएंगी, लेकिन 2019 आते-आते इनमें से 74 सिंचाई परियोजनाएं अटकी पड़ी हैं। इसी तरह इस बार बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में कहा है कि ग्रामीण विकास के लिए सालाना 5 लाख करोड़ यानी 5 साल में 25 लाख करोड़ खर्च करेगी, लेकिन सच्चाई यह है कि पिछले पांच साल में किसी भी साल ग्रामीण विकास पर 1लाख करोड़ भी खर्च नहीं हुआ।

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