ये हैं 5 ऐसे बाहुबली नेता जिनका यूपी की राजनीति में कायम है वर्चस्व!

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश का हाल भी कुछ ऐसा ही है। यहां राजनीति और अपराध जगत का बेहद ही करीबी रिश्ता रहा है। तो आइये आत हम आपको उन नेताओं के बारे में…

लखनऊ: भारत देश की राजनीति में अपराध जगत के बाहुबलियों की एंट्री होना कोई नई बात नहीं है। अपराध के साथ साथ राजनीति में भी इन माफियाओं की तूती बोलती है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश का हाल भी कुछ ऐसा ही है। यहां राजनीति और अपराध जगत का बेहद ही करीबी रिश्ता रहा है। तो आइये आत हम आपको उन नेताओं के बारे में…

अतीक अहमद

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अतीक अहमद को एक खतरनाक बाहुबली नेता के तौर पर जाना जाता है। वो देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की लोकसभा सीट फूलपुर से सांसद रह चुके हैं। उनपर हत्या की कोशिश, अपहरण, हत्या के करीब 42 मामले दर्ज हैं। फिलहाल भाजपा सरकार आने के बाद से अतीक अहमद जेल में हैं। लेकिन राजनीति में आने के बाद भी ये आज तक अपराध की दुनिया से बाहर नहीं निकल पाए हैं। सन 2007 में मायावती के शासनकाल में इनकी कई संपत्तियों को नष्ट कर दिया गया था। अब इनका बेटा भी राजनीति में कदम रख रहा है।

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मुख़्तार अंसारी

मुख़्तार अंसारी एक माफिया-डॉन होने के साथ-साथ ये उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख राजनेता भी हैं। इन्हें सूबे का बाहुबली नेता कहा जाता है। मऊ विधानसभा क्षेत्र से ये पांच बार विधायकी का चुनाव जीते हैं। 2010 में इन्हें आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त होने के कारण बहुजन समाज पार्टी ने पार्टी से निष्कासित भी कर दिया था, लेकिन फिर बाद में इन्हें पार्टी में शामिल कर लिया गया। बता दें कि मुख़्तार पर बीजेपी नेता कृष्णमंद राय की हत्या का भी आरोप लगा था।

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ रजा भैया

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ रजा भैया का नाम उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बाहुबली नेता के तौर पर लिया जाता है। अब तक निर्दलीय राजनीति करने वाला रजा भैया इस बार जनसत्ता दल बनाकर चुनावी मैदान में हैं। राजा भैया पर डीएसपी जिलाउल हक सहित कई हत्याओं का आरोप है। उनके पैतृक निवास प्रतापगढ़ जिले की कुंडा तहसील के बारे में कहा जाता था कि राज्य सरकार की सीमाएं यहां खत्म हो जाती हैं, क्योंकि वहां उनका अपना ही राज चलता था। सन 2007 में मायावती के शासनकाल में इनकी कई संपत्तियों को नष्ट कर दिया गया था। साथ ही इन पर पोटा लगाया गया था।

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विजय मिश्र

यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में मोदी लहर में जहां एक ओर बड़े-बड़े दिग्गज नेता हार रहे थे, वहीं दूसरी ओर भदोही जिले के ज्ञानपुर सीट पर बाहुबली नेता व विधायक विजय मिश्र ने लगातार चौथी बार जीत हासिल की। विजय मिश्रा की गिनती पूर्वांचल में राजनीति के बाहुबलियों के तौर पर होता हैं। बता दें कि 2012 में जेल में रहते हुए भी विजय मिश्रा ने बड़े अंतर से चुनाव जीता था।

हरिशंकर तिवारी

पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी की गिनती यूपी के बाहुबली नेताओं में होती रही है। पूर्वांचल के चर्चित जनप्रतिनिधि के रूप में पहचान बनाने वाले पूर्व मंत्री के बारे में यह कहा जाता रहा है कि सरकार चाहे किसी भी दल की रही हो सिक्का तो इनका ही चलता है। गोरखपुर के चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से आधा दर्जन बार विधायक रह चुके पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी पूर्वांचल के सबसे बड़े ब्राह्मण नेताओं में शुमार हैं।

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पूर्वांचल के कई सीटों पर उनका अच्छा खासा प्रभाव है। कई बार मंत्री रह चुके पंडित हरिशंकर तिवारी फिलहाल चुनावी राजनीति से दूर हैं लेकिन उनके परिवार के कई सदस्य सक्रिय राजनीति में हैं। उनके छोटे सुपुत्र विनय शंकर तिवारी उनकी पारंपरिक सीट चिल्लूपार से विधायक हैं। यूपी में बीजेपी की लहर के बावजूद वह चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे। बड़े पुत्र कुशल तिवारी 2009 में संतकबीरनगर से सांसद चुने गए थे। जबकि उनके भांजे गणेश शंकर पांडेय कई बार एमएलसी रहे हैं। वह विधान परिषद के सभापति भी रहे हैं।