मेघालय सरकार माइनिंग माफियाओं के लिए समर्पित : मोदी

Published by Rishi Published: December 16, 2017 | 3:09 pm
Modified: December 16, 2017 | 3:19 pm

आइजोल : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि केंद्र पूर्वोत्तरराज्यों की राजधानियों को रेल नक्शे पर लाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके मद्देनजर वह क्षेत्र में 15 नई परियोजनाओं को कार्यान्वयन करने जा रही है। मोदी ने अपने मिजोरम दौरे के दौरान कहा, “हम पूर्वोत्तर राज्यों की राजधानियों को रेल नक्शे पर लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत सरकार 47 हजार करोड़ की लागत वाली, 1385 किलोमीटर लंबाई वाली 15 रेल नई लाइनों का कार्यान्वयन करने जा रही है।”

उन्होंने कहा, “कनेक्टीविटी की कमी पूर्वोत्तर क्षेत्रों के विकास के पथ में बड़ी बाधाओं में से एक है।” मोदी ने कहा कि मेरी सरकार आधारभूत सुविधाओं में निवेश के माध्यम से परिवहन द्वारा परिवर्तन करना चाहती है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार एक्ट ईस्ट पॉलिसी को पूरी सक्रियता से निभा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा, “दक्षिण पूर्व एशिया के लिए एक द्वार के रूप में, मिजोरम इससे बेहद लाभ उठा रहा है। यह म्यांमार और बांग्लादेश के व्यापार के लिए एक प्रमुख पारगमन बिंदु के रूप में उभर सकता है।”

उन्होंने कहा कि नए भारत का सपना सभी तक विकास पहुंचने के बाद साकार हो सकता है।

केंद्र की योजना करीब 115 जिलों पर ध्यान केंद्रित करने की है,जो विभिन्न संकेतकों पर मूल्यांकन करते समय अपेक्षाकृत पिछड़े पाए जाते हैं। यह मिजरोम समेत पूर्वोत्तर राज्यों के पिछड़े जिलों को लाभ पहुंचाएगा।

उन्होंने कहा, “सबका साथ सबका विकास की विचारधारा में जाति, लिंग, धर्म, स्तर का विचार किए बिना सभी भारतीयों के पास नई खुशहाली में भाग लेने के समान मौके हैं।”

मोदी मिजोरम में 60 मेगावाट टूएरियल हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट (एचईपीपी)का उद्धघाटन करने पहुंचे थे। उन्होंने इस परियोजना को लोगों को समर्पित करते हुए कहा कि यह राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी।

मिजोरम में टूएरियल हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट केंद्र सरकार की पहली बड़ी सफल परियोजना है। मोदी ने कहा कि बिजली के अलावा जलाशय का पानी नेविगेशन के लिए नए रास्ते खोलेगा।

मोदी ने कहा, “यह गांवों को जोड़ने में मदद प्रदान करेगा। यह जलाशय 45 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा जगह में फैला है। साथ ही इसे मत्स्य पालन के विकास के लिए प्रयोग किया जा सकता है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि परियोजना पारिस्थितिकी पर्यटन को बढ़ावा देगी और पीने के पानी की सप्लाई का एक सूत्र प्रदान करने को सुनिश्चित करेगी।

उन्होंने कहा कि 1998 में परियोजना को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की केंद्र सरकार ने मंजूरी दी थी लेकिन कई कारणों से इसमें देरी हुई।

मोदी ने कहा, “इस परियोजना का पूरा होना पूर्वोत्तर क्षेत्रों में विकास के एक नया युग में प्रवेश करना और जारी परियोजना को पूरा करने की हमारी प्रतिबद्धता के एक प्रतिबिब को दर्शाता है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान पूर्वोत्तर के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए थे।

मोदी ने कहा, “हमने उस दृष्टि को आगे बढ़ाया है और पूर्वोत्तर की प्रगति के लिए संसाधनों को समर्पित किया है। मेरे मंत्रिमंडल के साथी पूर्वोत्तर का निरंतर अंतराल पर दौरा करते रहते हैं।”

उन्होंने कहा, “यहां करीब 150 मंत्रियों ने दौरा किया है। हमारी पहल-आपके द्वार पर डूनेर मंत्रालय ने पूर्वोत्तर के विकास के लिए उत्साह बढ़ाया है इससे हमें पूर्वोत्तर की आकांक्षाओं को समझने में मदद मिली है।”

मोदी ने यह भी कहा कि मिजोरम में आकर वह प्रसन्न हैं और बतौर प्रधानंमत्री उनकी पहली यात्रा है और इससे पहले भी वह राज्य की यात्रा कर चुके हैं।

उन्होंने कहा, “मैं यहां के लोगों के दोस्ताना रवैये और खूबसूरती की प्रशंसा करता हूं।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “ऊंची साक्षरता दर, दर्शनीय सुन्दरता और मिजोरम में बड़ी संख्या में अंग्रेजी भाषी आबादी राज्य के विकास का एक सर्वश्रेष्ठ मिश्रण है और यह इसे एक मॉडल पर्यटन स्थल बनाता है।”

क्या खास बोले पीएम 

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भविष्य में उत्तर-पूर्व में सी-प्लेन के जरिए आना जाना एक बेहतर कदम होगा। शिलॉन्ग में बड़े विमान उतर सकें इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से हवाई पट्टी के विस्तार को मंजूरी दे दी गई है : पीएम

बीते तीन साल में, मेरी सरकार के दौरान मेरे मंत्रियों कि ओर से उत्तर पूर्व के 150 से ज़्यादा दौरे हुए हैं, इतने दौरे शायद ही किसी दूसरी सरकार में हुए हो : पीएम

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उत्तर पूर्व को लेकर पहले की सरकारों का क्या रवैया रहा है, उससे आप अच्छी तरह परिचित रहे हैं। नॉर्थ-ईस्ट में योजनाओं अटके नहीं, भटके नहीं इसलिए ही 1972 में नॉर्थ-ईस्ट काउंसिल का गठन किया गया था। लेकिन इस काउंसिल को भी गंभीरता से कम ही लिया गया : पीएम

मोरारजी देसाई जी के बाद नॉर्थ-ईस्ट आकर अगर किसी प्रधानमंत्री ने नॉर्थ-ईस्टर्न काउंसिल की बैठक में हिस्सा लिया, तो वो मैं था। पिछले साल मैंने शिलॉन्ग में नॉर्थ-ईस्टर्न काउंसिल की बैठक का शुभारंभ किया था : पीएम

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पिछले साल मैं जब मेघालय आया था और यहां के लोगों ने मुझे जो चाय पिलाई थी उसका स्वाद आज भी मैं याद करता रहता हूँ : पीएम

 

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