Health : सही ब्रेस्टफीडिंग से रोक सकते है अनचाही प्रेग्नेंसी

Health : सही ब्रेस्टफीडिंग से रोक सकते है अनचाही प्रेग्नेंसी

डॉ. सीमा सिंह. स्त्री रोग विशेषज्ञ , लखनऊ

लखनऊ : मां बनने के छह-सात महीने बाद तक महिलाओं को महवारी नहीं आती है। इसकी वजह शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव है। ऐसे में महिलाओं को लगता है कि इस बीच गर्भधारण नहीं होगा। इसलिए वे गर्भनिरोधक उपायों को नहीं अपनाती हैं। लेकिन कई बार बिना महवारी शुरू हुए भी गर्भ ठहर जाता है जो मां और गर्भ में पलने वाले भू्रण दोनों के लिए खतरनाक होता है। असमय गर्भ ठहरने के पीछे सही तरीके से ब्रेस्टफीडिंग न कराना होता है। अगर महिला सही तरीके से ब्रेस्टफीड करायें है तो डिलवरी से छह माह तक बिना गर्भनिरोधक उपायों को अपनाये बिना भी अनचाहे गर्भ से बच सकती हैं। जिसे स्तनपान गर्भ निरोधक विधि या लैक्टेशन एमिनॉरिया मेथड (एलएएम) कहते हैं। इस विधि को अपनाकर महिलाएं न केवल अनचाहे गर्भधारण से बच सकती हैं बल्कि शिशु व खुद को भी सेहतमंद रख सकती हैं।

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डिलीवरी के बाद प्रेग्नेंसी कैसे?
डिलीवरी के लगभग छह-सात माह तक महिलाएं जब नियमित ब्रेस्टफीड कराती है तो इससे इनके शरीर में प्रोलैक्टिन नामक हार्मोन बनता है। प्रोलैक्टिन हार्मोन बनने से महिलाओं में एलएच,एफएसएच और एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरॉन नामक हार्मोन नहीं बनते हैं। इससे महवारी रुक जाती है। ये हार्मोन्स अंडाणु बनते हैं। अंडाणु गर्भधारण के लिए जरूरी होते हैं। लेकिन जो महिला सही तरीके से ब्रेस्टफीड नहीं कराती है तो उसके शरीर में प्रोलैक्टिन नहीं बनता है जिसके कारण एलएच, एफएसएच और एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरॉन हार्मोन बनने लगते हैं और असमय गर्भ ठहर जाता है।

डिलीवरी के तुंरत गर्भधारण के ये खतरे
दो बच्चों के बीच में कम से कम तीन साल का अंतर होना चाहिए। इससे पहले गर्भधारण करना मां और गर्भ में पल रहे भू्रण दोनों के लिए खतरनाक होता है। डिलीवरी के कम से कम 18 माह बाद ही अगले बच्चे के लिए गर्भधारण ठीक माना जाता है। इससे पहले गर्भ ठहरने पर प्रीम्चयोर डिलीवरी, जन्म के समय शिशु का वजन कम होना और गर्भपात का भी खतरा रहता है।

ब्रेस्टफीडिंग का ये है सही तरीका

  • शिशु को छह माह तक केवल मां का ही दूध पिलाना चाहिए।
  • दूध पिलाने में 5 से 30 मिनट तक समय लगता है। इसलिए रिलेक्स मूड में ही दूध पिलायें।
  • दिन में 8-10 बार और रात में 3-4 बार तक स्तनपान कराना चाहिए। अगर इसके बाद भी बच्चा भूखा है तो अधिक बार भी दूध पिलाया जाना चाहिए।

क्या है एलएएम
एलएएम विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से मां-शिशु को स्वस्थ्य रखने के लिए जारी निर्देश है। इसकी जानकारी डिलीवरी के बाद अस्पतालों में महिलाओं को दी जाती है ताकि वे छह महीने तक बिना किसी गर्भनिरोधक उपायों को अपनाए भी अनचाहे गर्भ से बची रहें और शिशु भी स्वस्थ रहे। इसके अनुसार-

  • शिशु को दिन में 6 से 8 और रात में कम से कम दो बार ब्रेस्टफीड अनिवार्य है।
  • छह माह तक बच्चे को मां के दूध के अलावा गाय-बकरी का दूध, पानी या जूस कुछ भी नहीं पिलाना चाहिए।
  • शिशु की उम्र छह माह से अधिक न हो।

मां का मोटापा घटता है स्तनपान
ब्रेस्टफीड न केवल शिशु बल्कि मां के लिए भी सेहतमंद होता है। अगर महिलाएं बच्चे के जन्म से 9-10 माह तक नियमित दूध पिलाती है तो डिलीवरी के कारण होने वाला मोटापा अपने आप ही कम हो जाता है। महिला डिलीवरी से पहले जितने वजन की हो जाती हैं। साथ ही ब्रेस्ट ट्यूमर व ब्रेस्ट कैंसर जैसी घातक बीमारियों का खतरा कम होता है। सांस संबंधी व मानसिक रोगों से भी बचाव होता है। नियमित स्तनपान मां व बच्चे को भावनात्मक रूप से जोड़ता है। बच्चे की इम्यूनिटी बढ़ती है।