आओ बच्चों तुम्हें बताएं, कैसे मनाएं बाल दिवस, कौन थे चाचा नेहरू

कठोर से कठोर व्यक्ति का दिल बच्चे की मुस्कान जीत लेती है। कहते हैं कि बच्चों का मन सच्चा होता है। ये नन्हें फूल हर किसी को प्यारे लगते हैं। शायर साहिर की ये चंद लाइने बच्चे मन के सच्चे ये वो नन्हे फूल है जो भगवान को लगते प्यारे….  बच्चों के मन की खूबसूरती को बयां करते हैं।

जयपुर:कठोर से कठोर व्यक्ति का दिल बच्चे की मुस्कान जीत लेती है। कहते हैं कि बच्चों का मन सच्चा होता है। ये नन्हें फूल हर किसी को प्यारे लगते हैं। एक फिल्मी गीत की ये चंद लाइने बच्चे मन के सच्चे ये वो नन्हे फूल है जो भगवान को लगते प्यारे….  बच्चों के मन की खूबसूरती को बयां करते हैं। कोई भी छोटा बच्चा घर के साथ आस-पास खुशियों से भर देता हैं। क्योंकि बच्चे इतने प्यारे और मासूम होते हैं कि सभी उनसे प्यार करते हैं। कल बाल दिवस है। पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिन। जो बच्चों के चाचा नेहरू थे पंडित नेहरू को भी बच्चों से बहुत लगाव था। यही वजह है कि उन्होंने ने अपना जन्म दिवस 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में।

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इतिहास

जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर, 1889 को इलाहाबाद में हुआ था। नेहरू जी को बच्चों से बहुत स्नेह था। उनका मानना था कि वे बच्चे देश  का भविष्य है। ये तो थे पंडित नेहरु के विचार, जो बच्चों से बहुत स्नेह व प्रेम रखते थे। चाचा नेहरु का जन्मदिन मनाने के लिए लाखों बच्चे अपने विद्यालय में इस अवसर पर भाग लेते है और पंडित जवाहर लाल नेहरू जी छोटे छोटे बच्चों के साथ अपना जन्म दिवस मनाते थे।

भारत में बाल दिवस सन् 1923 से मनाया जाने लगा था लेकिन 1953 में बाल दिवस को पूरी मान्यता मिली। कुछ देशों में आज भी 20 नवम्बर को बाल दिवस मनाया जाता है और कई देशों में सन् 1950 से 01 जून को ही बाल सुरक्षा दिवस मनाया जाने लगा। बाल दिवस मनाने के बहुत से कारण है जिनमे से एक यह भी है की इस दिन बच्चों को लाकर बहुत गंभीरता से उनके भविष्य को लेकर निर्णय लिया जाए।

बाल दिवस मनाने के बहुत से कारण है जिनमें से एक ये भी है की इस दिन बच्चों के भविष्य को लेकर गंभीर है। बच्चों की अच्छी से अच्छी शिक्षा मिल सके इसलिए उनके बारे में अलग अलग नियम लागू किए जाते है जिसकी वजह से आज भारत देश में बाल मजदूरी पर रोक लगा दी गयी है। जानते हैं बाल दिवस पर ऐसा क्या करें कि नन्हे से चेहरे पर मुस्कान आएं और देश का भविष्य इन बच्चों से उज्जवल हो।

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 पैरेंट्स की भूमिका बाल दिवस पर

*बच्चों के लिए एक दिन उन्हें पढ़ाई से अलग कुछ एक्टिविटी में शामिल करें ताकि उनका पूर्ण रूप से विकास हो सके।

*बच्चों के मानसिक व शारीरिक विकास  के साथ उन्हें कई एक्टिविटी में शामिल किया जाए, इसीलिए इस दिन विशेष रूप से बच्चों के लिए कई कार्यक्रम एवं खेल-कूद के आयोजन होता है।

*आजकल के माता-पिता के पास वक्त नहीं होता है कि वो बच्चों के साथ वक्त बिताएं। पैरेंट्स अपने काम में बिजी होने के कारण बच्चों को मोबइल  देते हैं। ऐसे में बच्चों के साथ वे कम से कम वक्त बिताते हैं।उन पैरेंट्स के लिए है कि वह अपने बच्चे का एक दिन खास बनाएं।

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*बाल दिवस बच्चों को बाहरी दुनिया से जोड़ने का काम करता हैं। इस दिन हर माता-पिता की कोशिश होनी चाहिए कि वे अपने बच्चे के साथ वक्त बिताएं और उन पर पूरा ध्यान दें।

*बच्चों को यह भी बताएं की बाल दिवस जिस दिन के रूप में मनाया जाता है, वह शख्स क्यों खास हैं। हमारे देश के पहले प्रधानमंत्री है। इस दिन को चाचा नेहरू के लिए भी याद किया जाना चाहिए।

*इस दिन बच्चों के लिए क्विज से लेकर डांस, पेंटिंग, स्पोर्ट्स, सिंगिंग, भाषण, जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा सकता है। बच्चों का इससे विकास भी होगा और वे नई चीजें भी सीख पाएंगे।

*बच्चों को इस दिन दोस्ती और भाईचारे की बात भी बतानी चाहिए। उन्हें यह भी बताना चाहिए कि किस तरह भविष्य के विकास की कल्पना की जानी चाहिए। साथ ही पढ़ाई में केवल किताबी ज्ञान से कुछ नहीं होगा, व्यावहारिक ज्ञान हासिल करना जरूरी है।

 

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*बाल दिवस के दिन एक अच्छी शुरुआत यह भी कर सकते हैं कि बच्चों को इस दिन बचत करना सिखाएं और उन्हें पिगी बैंक गिफ्ट दे सकते हैं, ताकि कम उम्र से ही वे बचत की आदत डालें। इसके अलावा बच्चों को चॉकलेट और घर में बनी उनकी पसंदीदा मिठाई का पैकेट भी गिफ्ट कर सकते हैं। अगर बच्चों को खिलौनों का शौक है तो कुछ स्पेशल थीम वाले खिलौने गिफ्ट करें।