जैविक खेती से साफ होगी अब गंगा, रासायनिक खादों से छुटकारा दिलाएगा वेस्ट डिकम्पोजर

Published by Published: June 9, 2017 | 11:33 am
Modified: June 9, 2017 | 12:22 pm

अमित यादव
लखनऊ: अब तक आपने सुना होगा कि खेती से केवल किसान बेहतरीन फसलों को उगाते हैं, लेकिन केंद्र सरकार की पहल से ऐसा संभव हो सका है कि जैविक खेती से गंगा को गंदा होने से बचाया जा सके। केंद्र सरकार की नमामि गंगा योजना के तहत ऐसा संभव हो सका है। गंगा नदी को साफ करने के लिए केंद्र सरकार जुटी हुई है। गंगा के दोनों किनारों में खेती होती है।

इसमें रासायनिक खादों का प्रयोग किया जाता है। अब सरकार इन खादों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की तैयारी की है। सरकार गंगा के दोनों किनारों में जैविक खेती कराने की तैयारी की है। नमामि गंगे योजना के तहत इसको बढ़ावा दिया जाएगा। उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक गंगा के दोनों किनारों की 1657 ग्राम पंचायतों को इसमें शामिल किया गया है। यूपी में कानपुर नगर, वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली, हापुड़, बदायूं, बलिया, बुलंदशहर, इलाहाबाद आदि जिलों के ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है।

इस काम की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की संस्था जैविक खेती केंद्र को दी गई है। जैविक खेती केंद्र किसानों के साथ अनुबंध करके इस योजना को आगे बढ़ाएगा। सरकार का मानना है कि इससे देश में जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही गंगा भी प्रदूषित होने से बचेगी। खेती में प्रयोग होने वाली रासायनिक खादों से गंगा नदी पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

क्या है जैविक खेती
भूमि की उर्वरा शक्ति को बचाए रखने के लिए जैविक खेती विधि का प्रयोग किया जाता है। इस विधि के अंतर्गत संश्लेषित उर्वरकों और कीटनाशकों के कम प्रयोग पर जोर दिया जाता है। यह विधि मानव जनजीवन स्वास्थ्य के लिए अंत्यन्त लाभकारी साबित होता है।

जैविक खेती के लाभ
फसल पैदावार की क्षमता बढ़ती है। रासायनिक खाद का कम प्रयोग करने से लागत में कमी आती है। भूमि की गुणवत्ता में सुधार आता है। जलधारण की क्षमता में वृ़िद्ध होती है। जैविक विधिका प्रयोग कर पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है। कचरे का उपयोग होने से बीमारियों में कमी आती है। किसानों के आय में भी वृद्धि होती है।

यूपी के इन शहरों के गंगा दोनों किनारे होगी जैविक खेती
बलिया, बदायूं, बुलंदशहर, कानपुरनगर, कांशीराम नगर, इलाहाबाद, कौशांबी, मेरठ, मीरजापुर, मुजफ्फरनगर, प्रतापगढ़, गाजीपुर, सहारनपुर, उन्नाव, वाराणसी, चंदौली, हापुड़, हरदोई, कन्नौज, रायबरेली, संत रविदास नगर

बाजार भी मिलेगा किसानों को
इस योजना को बड़े ही व्यवस्थित तरीके से चलाया जाएगा। किसानों को उत्पादन बाजार तक पहुंचवाया जाएगा। अभी जैविक उत्पादों का बाजार बहुत अधिक नहीं है। इसलिए किसानों को दिक्कत भी होगी। लेकिन जैविक खेती केंद्र किसानों के लिए बाजार भी मुहैया कराएगा। पहले जिला स्तर पर बाजार दिए जाएंगे ताकि किसानों को उनके लिए उत्पादों का सही मूल्य मिल सके। इसके बाद ग्राम स्तर तक बाजार को मुहैया कराने की तैयारी है। अधिकारियों की माने तो किसानों को जागरूक करने के लिए जिला स्तर पर कार्यक्रम होंगे। उनको इसके प्रति जागरूक किया जाएगा।

रासायनिक खादों से छुटकारा दिलाएगा वेस्ट डिकम्पोजर
खेती में रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र जैविक खादों पर जोर दे रहा है। केंद्र ने वेस्ट डिकम्पोस्ट के जरिये खेती करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है। 20 रुपए के डिकम्पोस्ट से कई एकड़ के लिए खाद बनाई जा सकती है। इस डिकम्पोस्ट का प्रयोग फसलों की सिंचाई, तैयार फसल में छिड़काव और बीजों के शोधन में किया जा सकता है।

केंद्र किसानों को इस के प्रयोग की विधि को बताता है और डेमो करके भी दिखाता है। खेती में रासायनिक खादों और रसायन के हो रहे अंधा-धुंध प्रयोग से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। साथ ही धीरे-धीरे उत्पादन पर भी असर पड़ता है। इस प्रयोग को कम करने के लिए जैविक खादों के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। इस काम को और तेजी से करने के लिए राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र गाजियाबाद भी आगे आया है। केंद्र ने डिकम्पोस्ट को विकसित किया है।

गाय के गोबर से इस डिकम्पोस्ट को बनाया गया है। इसका प्रयोग जैविक खाद के साथ-साथ फसलों में छिड़काव, बीजों के शोधन में भी किया जा सकता है। प्रदेश के सैकड़ों किसान इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, किसानों ने इसके परिणाम भी बेहतर बताए हैं।

राष्ट्रीय जैविक खेती केंद्र के निदेशक कृष्ण चंद्र के मुताबिक, डिकम्पोस्ट का इस्तेमाल प्रदेश के सैकड़ों किसान कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इसके इस्तेमाल से उत्पादन भी बढ़ेगा।

इस तरह इस्तेमाल करेंगे डिकम्पोस्ट
डिकम्पोस्ट एक छोटी सी शीशी में होता है। 200 लीटर पानी में 2 किलो गुड़ डालकर मिला दें। इसके बाद डिकम्पोस्ट को मिला दें। इसको ठीक प्रकार से मिला दें। गर्मियों में दो दिन और सर्दियों में 4 दिन तक इसे रखें। इसके बाद इसका इस्तेमाल करें। इस दौ सौ लीटर घोल से एक बाल्टी घोल को फिर 200 लीटर पानी में मिला लें। इस तरह यह घोल बनाते रहें। खेत की सिंचाई करते समय पानी में इस घोल को डालते रहें।

ड्रिप सिंचाई के साथ इस घोल का प्रयोग कर सकते हैं। इससे पूरे खेत में यह फैल जाएगा। कम्पोस्ट खाद बनाने के लिए 1 टन कूड़े-कचरे (कम्पोस्ट बनाने के लिए) में 20 लीटर तैयार घोल छिड़क दें। इसके ऊपर फिर एक परत बिछा दें। फिर घोल का छिड़काव करें। 40 दिन में कम्पोस्ट खाद तैयार हो जाएगी। इसके अलावा फसलों की बीमारी को दूर करने के लिए हर एक महीने में एक बार इसका छिड़काव करें।

नमामि गंगे योजना के तहत गंगा के दोनों किनारों में जैविक खेती की जाएगी। इसके लिए ग्राम पंचायतों का चयन हो चुका है। किसानों के साथ वार्ता करके इस योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कार्यक्रम भी होंगे। किसानों को बाजार भी उपलब्ध करवाया जाएगा ताकी उनका उत्पादन बिक सके। उन्हें सही कीमत मिल सके।