बर्थडे: गैराज में काम करते थे ‘गुलजार’,शादी के एक साल बाद ही पत्नी से हो गये थे अलग

मुंबई: संपूर्ण सिंह कालरा यानी गुलजार साहब का आज जन्मदिन है। वह एक ऐसे लेखक और शायर हैं जो किसी परिचय के मोहताज नहीं। आप उन्हें कवि, शायर, महान गीतकार, फिल्मकार, कथाकार, निबंधकार, निर्देशक, अनुवादक या बाल साहित्यकार कुछ भी कह सकते हैं। आज वे अपने जीवन के 84वां पड़ाव पार कर चुके हैं।
इस खास मौके पर newstrack.com आज आपको गुलजार की अनटोल्ड स्टोरी के बारे में बता रहा है।

गैराज में मैकेनिक के तौर पर किया काम
गुलजार का जन्म 18 अगस्त 1934 को बंटवारे से पहले पंजाब में झेलम जिले के दीना गांव में हुआ था, जो आज पाकिस्तान में है। उनका जन्म एक सिख परिवार में हुआ था। बंटवारे के बाद वो परिवार के साथ पंजाब में आकर रहने लगे। गुलजार शुरुआत से एक लेखक बनना चाहते थे, परिवार की मर्जी के खिलाफ वो मुंबई पहुंचे और यहां एक गैराज में मैकेनिक के तौर पर काम करने लगे। साथ ही खाली समय में कविताएं लिखा करते थे।

बंदिनी’ मूवी के इस गाने से की करियर की थी शुरुआत
मुंबई पहुंचने के बाद गुलजार निर्देशक बिमल रॉय, ऋषिकेश मुखर्जी और संगीतकार हेमंत कुमार के साथ सहायक के तौर पर काम करने लगे। उन्होंने बिमल रॉय की फिल्म ‘बंदिनी’ में अपना पहला गाना ‘मोरा गोरा अंग’ लिखा। जबकि बतौर निर्देशक के तौर पर पहली फिल्म साल 1971 में ‘मेरे अपने’ बनाई। शुरुआती फिल्मों में उनकी पसंद संजीव कुमार रहे, जिनके साथ गुलजार ने कोशिश(1772), आंधी (1974), मौसम (1975), अंगूर(1981) और नमकीन (1982) जैसी फिल्में बनाई।

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भारत सरकार ने किया पद्म भूषण से सम्मानित
अपनी लेखन कला के जरिए गुलजार ने सभी बड़े पुरस्कार जीते। साल 2004 में गुलजार को भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया। ‘स्लमडॉग मिलेनियर’ के गाने ‘जय हो’ के लिए गुलजार और रहमान को संयुक्त रूप से बेस्ट ओरिजनल स्कोर का अवॉर्ड मिला।

शादी के एक साल बाद ही पत्नी से हो गये अलग
सार्वजनिक जीवन में बेहद सफल रहे गुलजार की शादीशुदा जिंदगी उतनी बेहतर नहीं रही। उन्होंने एक्ट्रेस राखी से शादी की और दोनों की बेटी मेघना गुलजार हैं जो कि एक फिल्म डायरेक्टर हैं। बेटी के पैदा होने के एक साल बाद 1974 में दोनों अलग हो गए हालांकि गुलजार और राखी के बीच तलाक नहीं हुआ लेकिन दोनों करीब 44 साल से एक दूसरे से अलग रह रहे हैं।

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