ग्राम विकास अधिकारियों की भर्ती की रिक्त बची सीटों पर नियुक्ति की मांग

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 3133 ग्राम विकास अधिकारियों की भर्ती मामले में भरने से बची सीटों पर मेरिट से नीचे के अभ्यर्थियों का चयन व नियुक्ति की मांग में दाखिल याचिका पर उ प्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग व् राज्य सरकार से जानकारी मांगी है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 3133 ग्राम विकास अधिकारियों की भर्ती मामले में भरने से बची सीटों पर मेरिट से नीचे के अभ्यर्थियों का चयन व नियुक्ति की मांग में दाखिल याचिका पर उ प्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग व् राज्य सरकार से जानकारी मांगी है।

याचिका की सुनवाई 16 जुलाई को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने अमरोहा के अनिल कुमार व अन्य की याचिका पर दिया है।

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2016 में 3133 पद विज्ञापित हुए थे

याची का कहना है कि उ प्र ग्रामीण विकास (ग्राम सेवक) सेवा नियमावली 1980 के नियम 5 के तहत सीधी भर्ती में रिक्ति से 25 फीसदी अधिक का चयन किये जाने की व्यवस्था है। 2016 में 3133 पद विज्ञापित हुए।

सरकारी अधिसूचना के अनुसार प्रतीक्षा सूची तैयार होगी किन्तु प्रकाशित नहीं होगी। कार्यालय में रखी जायेगी। बाद में15 नवम्बर 1999 के शासनादेश से एकल कैडर पद पर प्रतीक्षा सूची न बनाने का फैसला लिया गया।

त्रिलोकी नाथ मिश्र केस में हाई कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया। 2014 में चयन आयोग का गठन हुआ। जो ग्रुप सी पदों की भर्ती करेगा। नियमावली बनी जिसमे प्रतीक्षा सूची तैयार करने की व्यवस्था नहीं की गयी।

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186 पद के परिणाम रोके गये

18 जुलाई 2018 को चयन परिणाम घोषित हुआ। 2947 सफल हुए। 186 पद के परिणाम रोक लिए गए जिसमें से 70 पूर्व सैनिक कोटे के है। कुछ खामियों के कारण 116 के परिणाम रोके गये है।

लगभग 500 अभ्यर्थियों के बेहतर सेवा मिल जाने के कारण पद भार ग्रहण नहीं करने के कारण खाली रह गए। प्रतीक्षा सूची न होने से खाली पदों को भरा नहीं गया है।

जब कि सुप्रीम कोर्ट ने शिव श्याम केस में कहा है कि चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पर विचार किये जाने का अधिकार है। ऐसे में प्रतीक्षा सूची बननी चाहिए। पद खाली है, याचीगण मेरिट लिस्ट से नीचे है। खाली पदों को मेरिट लिस्ट से नीचे के लोगों से भरा जाय।