उपचुनाव: क्या यूपी की इन दो सीटों पर बीजेपी लहरा पायेगी जीत का परचम? यहां जानें

यूपी की 11 विधानसभा सीटों पर सोमवार को होने वाले उपचुनाव में जीत के लिए वैसे तो भाजपा पूरी तरह से आश्वस्त है पर उसके लिए रामपुर और जलालपुर सीट जीतना सबसे बडी चुनौती है।

श्रीधर अग्निहोत्री

लखनऊ: यूपी की 11 विधानसभा सीटों पर सोमवार को होने वाले उपचुनाव में जीत के लिए वैसे तो भाजपा पूरी तरह से आश्वस्त है पर उसके लिए रामपुर और जलालपुर सीट जीतना सबसे बडी चुनौती है। इन दो सीटों पर भाजपा ने काफी मेहनत की है पर अभी भी पार्टी यहां जीत के प्रति आश्वस्त नहीं दिख रही है।

अतीत पर गौर किया जाए तो वर्ष 1989 से अब तक विधानसभा के आठ चुनावों में रामपुर सीट पर भाजपा कभी भी नहीं जीत सकी है। विधानसभा चुनाव में रामपुर सीट भाजपा की पकड़ से दूर ही रही।

वर्ष 1996 में यहां कांग्रेस को जीत मिली थी। वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा की लहर में भी यहां आजम को 47.74 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि भाजपा को 25.84 प्रतिशत।

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रामपुर सीट पर आजम खान का कब्जा

यह बात अलग है कि 2014 की मोदी लहर में भले ही इस संसदीय सीट से भाजपा के नेपाल सिह चुनाव जीते हों पर उसके बाद फिर 2019 के चुनाव में मो आजम खां इस सीट से सांसद बने।

एक बार मुखता अब्बास नकवी भी भाजपा से जीते। 50 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाली इस सीट पर मो आजम खां का ही कब्जा रहा है। इस बार यहां पर भाजपा ने भारत भूषण गुप्ता को चुनाव मैदान में उतारा है। भारत भूषण गुप्त

2012 में यहां बसपा के टिकट पर लड़े थे और तीसरे स्थान पर रहे थे। इस सीट को जीतने के लिए भाजपा ने कई रैलियां की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने यहां रैलियां की है।

इसके अलावा कई मंत्री यहां लगातार डेरा जमाए रहे हैं। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन भी भाजपा ने एक बडी जुलूस निकालकर माहौल बनाने की कोशिश की। इस जुलूस में कई मंत्री और पदाधिकारी शामिल हुए।

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जलालपुर सीट जीतने के लिए बीजेपी ने झोंकी ताकत

यही हाल लखनऊ से सटी संसदीय सीट अंबेडकरनगर की जलालपुर सीट का भी है जहां भी केवल एक बार 1996 में भाजपा चुनाव जीत पाई। यहां भाजपा को 1989 से अब तक केवल एक बार 1996 में चुनाव जीती है।

तब भाजपा से शेरबहादुर सिंह चुनाव जीते थें। भाजपा रणनीतिकारों ने इस बार एक रणनीति के तहत उनके पुत्र डॉ. राजेश सिंह को मैदान में उतारा है।

भाजपा ने 2017 के आम चुनाव में भी राजेश को लड़ाया था, लेकिन बसपा के रितेश पांडेय को कड़ी टक्कर देने के बावजूद लगभग 13 हजार वोटों से हार गए।

इस बार भाजपा के लिए उम्मीद इसलिए दिख रही है क्योंकि शेरबहादुर सिंह या उनके परिवार का कोई व्यक्ति जब भी भाजपा से लड़ा तो इस पार्टी का वोट सम्मानजनक संख्या तक पहुंचा।

जलालपुर में उपचुनाव की घोषणा से पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां पर करोड़ों की योजनाओं की सौगात देने के साथ जीत सुनिश्चित करने के लिए अपने मंत्रियों की फौज उतारी। पार्टी के प्रचार के लिए कानून मंत्री बृजेश पाठक के साथ दर्जन भर मंत्री और संगठन के लोग प्रचार में लगे रहें।

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