यूपी: चीनी मिल घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने दर्ज किया केस

सीबीआई के फॉर्म में आने के बाद अब प्रर्वतन निदेशालय (ईडी) ने चीनी मिल घोटाले की प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत केस दर्ज किया है।

लखनऊ: सीबीआई के फॉर्म में आने के बाद अब प्रर्वतन निदेशालय (ईडी) ने चीनी मिल घोटाले की प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत केस दर्ज किया है।

दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय से मंजूरी मिलते ही ईडी के लखनऊ में जोनल कार्यालय ने यह कार्रवाई हुई है। प्रवर्तन निदेशालय के द्वारा केश दर्ज होते ही चीनी मिल घोटाले से जुड़े लोगो की मुश्किलें बढ़ गयी है। सीबीआई जाँच की सिफारिस योगी सरकार के लोकायुक्त के जाँच के उपरांत दी है।

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मिलों को औने -पौने दामों पर बेचने का आरोप

आरोप है कि तत्कालीन मायावती सरकार में चीनी निगम की 10 संचालित और 11 बंद पड़ी चीनी मिलों को औने-पौने दामों में बेचकर ग्यारह सौ करोड़ रुपयों का घोटाला किया था। दरअसल 2010-11 में चीनी निगम की 10 चालू और 11 बंद पड़ी चीनी मिलों को बेचा गया था।

उस दौरान उत्तर प्रदेश में मायावती के नेतृत्व में बसपा सरकार थी। इसमें 1100 करोड़ के घोटाले का आरोप है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस मामले की जांच सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेशन आर्गनाइजेशन (एसएफआइओ) से इस मामले की जांच करवाई थी।

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मिलों की खरीदारी में जाली दस्तावेजों का प्रयोग

एसएफआइओ की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में देवरिया, बरेली, लक्ष्मीगंज, हरदोई, रामकोला, चितौनी और बाराबंकी में सात बंद चीनी मिलों के खरीदार द्वारा जाली दस्तावेज प्रस्तुत किए गये थे।

नम्रता मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड नामक एक कंपनी ने 11 अक्तूबर 2010 को देवरिया, बरेली, लक्ष्मीगंज-कुशीनगर और हरदोई की मिलें खरीदने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट कम रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन पेश किया था। एक अन्य गिरियाशो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने भी यही प्रक्रिया अपनाई थी।

आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर समिति ने दोनों कंपनियों को आगे की प्रक्रिया के लिए योग्य घोषित कर दिया था जबकि दोनों कंपनियों की बैलेंस शीट और अन्य दस्तावेजों में भारी अनियमितता थी।

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योगी सरकार में जांच की सिफारिश

इस रिपोर्ट के आधार पर राज्य चीनी निगम के प्रबंध निदेशक की ओर से गोमतीनगर थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया गया। बाद में योगी आदित्यनाथ सरकार चीनी मिल विनिवेश की सीबीआई से जांच की सिफारिश की थी। इस पर सीबीआई लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने इसी साल अप्रैल माह में चीनी मिल घोटाले का मुकदमा दर्ज किया था।

सीबीआई ने यह मामला गोमतीनगर थाने में 7 नवम्बर 2017 को दर्ज प्राथमिकी को आधार बनाते हुए दर्ज किया था। इसमें सात चीनी मिलों में हुई धांधली में रेगुलर केस दर्ज किया गया, जबकि 14 चीनी मिलों में हुई धांधली को लेकर छह प्रारंभिक जांच दर्ज की गईं थीं।

इसी के तहत बीते मंगलवार को सीबीआई ने चीनी मिल घोटाले में बसपा सुप्रीमो मायावती के प्रमुख सचिव रहे पूर्व आईएएस अधिकारी नेतराम व मायावती सरकार में चीनी मिल निगम संघ के एमडी रहे विनय प्रिय दुबे के घरों समेत 14 ठिकानों में छापेमारी की थी।

इसके साथ ही पूर्व एमएलसी इकबाल के बेटों जावेद व वाजिद के ठिकानों को भी सीबीआई ने छापेमारी की। दोनों चीनी मिल घोटाले में नामजद आरोपित हैं। चीनी मिले खरीदने वाली दो फर्मां के संचालकों की संपत्तियां भी ईडी के निशाने पर हैं।

इन लोगों पर दर्ज है एफआईआर

फर्जी दस्तावेजों के माध्याम से जनपद देवरिया, बरेली, लक्ष्मीगंज, हरदोई, रामकोला, छितौनी व बाराबंकी स्थित सात चीनी मिलें खरीदने के मामले में सीबीआई ने दिल्ली निवासी राकेश शर्मा, उनकी पत्नी सुमन शर्मा, गाजियाबाद निवासी धर्मेंद्र गुप्ता, सहारनपुर निवासी सौरभ मुकुंद, मोहम्मद जावेद, मोहम्मद वाजिद अली व मोहम्मद नसीम अहमद के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया था।