मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग का हब बन रहा भारत

लखनऊ: आंध्र प्रदेश के चित्तूड़ और नेल्लोर जिलों में बसी है श्री सिटी जिसमें सिर्फ बिजनेस संबंधी गतिविधियां होती हैं। इन्हीं गतिविधियों में शामिल है आई फोन का निर्माण। श्री सिटी में है फॉक्सकॉन टेक्रॉलजी ग्रुप का मोबाइल फोन प्लांट जहां हजारों महिलाएं काम करती हैं। आम धारणा है कि स्मार्टफोन सिर्फ चीन में बनते हैं लेकिन अब हालात बदल गए हैं। भारत भी इनके प्रोडक्शन का हब बन गया है।

फॉक्सकॉन, जिसे हॉन हाय प्रीसीज़न इंडस्ट्री कंपनी के नाम से भी जाना जाता है, ने भारत में अपना पहला संयंत्र चार साल पहले खोला था। आज इसके दो एसेम्बली संयंत्र हैं जबकि इनके विस्तार तथा दो और संयंत्र खोले जाने की योजना है।

दरअसल ताइपे स्थित यह कंपनी चीन के बाहर अपना काम फैला रही है और इस क्रम में भारत एक महत्वपूर्ण मैन्यूफैक्चरिंग बेस बन गया है। जबसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के साथ कारोबारी युद्ध को तेज कर दिया है तबसे मैन्यूफैक्चरिंग के काम के नजरिए से भारत का महत्व एकदम से बढ़ गया है। ट्रंप ने चीन में बनी जिन चीजों पर शुल्क लगा दिया है उनमें फॉक्सकॉन द्वारा एप्पल और अमेजॉन के लिए बनाई जानी वाली चीजें भी शामिल हैं। जिन कंपनियों का मैन्यूफैक्चरिंग बेस सिर्फ चीन में था वह अब समझ गईं हैं कि सिर्फ एक ही देश में काम करना समझदारी नहीं है। खास तौर पर चीन के मामले में ऐसा करना अब जोखिम का काम है। ऐसे में कंपनियों ने फायदे व भरोसेमंद विकल्प ढूंढने शुरू कर दिए हैं। कंपनियां ऐसी जगह कारखाना लगाना चाहती हैं जहां सस्ता श्रम उपलब्ध हो, काम करना आसान हो और लागत कम पड़ती हो।

भारत में फॉक्सकॉन का पहला संयंत्र २०१५ में श्री सिटी में लगा था। श्री सिटी एक स्पेशल इकॉनमिक जोन (एसईजेड) है जहां विदेशी कंपनियां डायपर से लेकर ट्रेनों के डिब्बे तक बनाती हैं। फॉक्सकॉन के संयंत्र में करीब १५ हजार कर्मचारी काम करते हैं जिनमें ९० फीसदी महिलाएं हैं। ये कर्मचारी शियोमी समेत विभिन्न कंपंनियों के लिए फोन असेम्बल करते हैं। हाल के महीनों में इन संयंत्र में एप्पल के आईफोन एक्स की असेम्बली और टेस्टिंग का काम शुरू हुआ है। यहां बने आईफोन एक्स पहले भारत में बेचे जाएंगे फिर इनका निर्यात किया जाएगा। फॉक्सकॉन का मोबाइल फोन का दूसरा कारखाना २०१७ में श्रीपेरम्बदूर में खुला जहां १२ हजार कर्मचारी काम करते हैं।

फॉक्सकॉन

फॉक्सकॉन के संयंत्रों में चीन से पुर्जे आते हैं जिनको असेम्बल किया जाता है। कंपनी को उम्मीद है कि भविष्य में यहीं पर ही डिस्प्ले और प्रिंटेड सर्किट बोर्ड का निर्माण होने लगेगा। कंपनी जल्द ही अमेजॉन इको स्पीकर्स समेत अन्य आइम भी बनाने लगेगी।

सस्ता श्रम, मददगार सरकार

जो कंपनियां चीन में काम करती थीं उन्हें भारत काफी सस्ता लग रहा है। यहां लेबर की कीमत चीन के मुकाबले आधी है, इंजीनियर्स समेत हुनरमंद कर्मचारियों की कमी नहीं है और सरकार का रुख बेहद मददगार है। मोदी सरकार की मेक इन इंडिया नीति के तहत विदेशी कंपनियों को भारत में कारखाने लगाने के लिए सुविधाएं दी जा रही हैं। इंडियन सेल्यूलर एंड इलेक्ट्रानिक्स एसोसिएशन के अनुसार, मेक इन इंडिया के लांच होने से अब तक इलेक्ट्रानिक्स मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में ७ लाख नौकरियां सृजित हुईं हैं।

क्या है एसईजेड

एसईजेड ऐसे क्षेत्र होते हैं जहां से सामान आयात व निर्यात किए जा सकते हैं और सरकारी बाबूगीरी का दखल कम से कम होता है। एसईजेड में व्यापार व व्यवसाय संबंधी कानून बाकी देश से अलग होते हैं। आमतौर पर यहां के आयात-निर्यात पर कोई ड्यूटी नहीं लगती है।