बिहार में मौतों का कहर अब ले रहा गोरखपुर के बच्चों की जान

Published by Vidushi Mishra Published: June 28, 2019 | 9:30 am

नई दिल्ली: गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इस साल जापानीज इंसेफेलाइटिस (जेई) और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एइएस) के कुल 87 मरीज भर्ती हुए, जिसमें 19 मरीजों की मौत हो गई। हालांकि पिछले दो सालों की तुलना में इस साल मरीजों की संख्या और मौत का आंकड़ा काफी कम है।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ गणेश कुमार ने बताया कि 2017 में 2248 से ज्यादा जेई और एइएस के मरीज भर्ती हुए थे, जिनमे 512 मरीजों की मौत हो गई थी। 2018 में इस बीमारी से ग्रसित मरीजों की संख्या 1047 थी, जिसमें से 166 लोगों की जान नहीं बचा सके। इस साल 2019 में अब तक हमारे यहां 87 मरीज भर्ती हुए, जिनमे 19 की मौत हो गई।

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डॉ गणेश कुमार ने बताया कि इस साल हमने पहले से ज्यादा तैयारी की है ताकि मौत का आंकड़ा कम हो सके। हमने बेड की संख्या को बढ़ा दिया है।  हमारे पास वेंटीलेटर हैं। पीडियाट्रिक विभाग में मेडिकल स्टोर की व्यवस्था भी कर दी गई है। हमने नियमित लिक्विड ऑक्सीजन सप्लाई की भी व्यवस्था की है। इस साल जेई और एइएस के मरीजों की संख्या में कमी भी देखने को मिल रही है।

गौरतलब है कि अगस्त 2017 में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने से 60 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई थी। मामले में सूबे की योगी सरकार की काफी किरकिरी हुई थी।

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इस हादसे के बाद से सरकार का दावा है कि उसने जेई व एइएस की रोकथाम के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। पूर्वांचल के 11 प्रभावित जिलों में टकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। साथ करीं ढाई लाख वालंटियर्स की टीम भी लोगों को जागरूक करने में लगी। साथ ही सभी अधिकारियों में अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है।

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