IAS ने दिखाई राह, बच्चों को मिल रहा ताजी सब्जियों वाला मिड-डे मील

Published by Admin Published: May 8, 2016 | 12:28 pm
Modified: August 10, 2016 | 2:48 am

कानपुरः आए दिन मिड-डे मील में गड़बड़ी से बच्चों के बीमार होने की खबर मिलती है। कभी सब्जी सड़ी होती है, तो कभी कीड़ों की वजह से बच्चों की तबीयत खराब होती है। ऐसे में एक युवा महिला आईएएस ने बच्चों को ताजा और पौष्टिक खाना देने की अनूठी पहल की है। आईएएस अपूर्वा दुबे ने एक स्कूल में ही किचन गार्डन बनवाया है। जहां उगाई जा रही ताजी सब्जियां बच्चों को मिड-डे मील में परोसी जाती हैं।

अपूर्वा का ‘अपूर्व’ काम
-कानपुर देहात में अपूर्वा दुबे ज्वाइंट मजिस्ट्रेट हैं।
-उन्होंने हसनापुर गांव के स्कूल में किचन गार्डन बनवाया है।
-यहां पालक, धनिया, गाजर और मूली उगाई जा रही है।
-मेथी, हरी मिर्च की भी बुवाई कराई गई है।
-अपूर्वा ने मनरेगा के तहत किचन गार्डन बनवाया है।

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बच्चों को मिल रहा पौष्टिक भोजन
-स्कूल के मिड-डे मील में किचन गार्डन की ताजी सब्जियां पकती हैं।
-ताजी सब्जियां खाने से बच्चों को पोषण भी मिलता है।
-सड़ी और कीड़े वाली सब्जी भी मिड-डे मील में इस्तेमाल नहीं होती।
-बच्चे और स्कूल का स्टाफ इससे काफी खुश है।

खाली पड़ी जमीन का हुआ सदुपयोग
-पहले स्कूल में काफी खाली जमीन हुआ करती थी।
-अपूर्वा ने जमीन देखा तो किचन गार्डन बनवाना शुरू किया।
-सब्जियां भी अब बाजार से नहीं खरीदनी पड़ती।

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आला अफसर कर रहे तारीफ
-सीडीओ आरके सिंह ने अपूर्वा के काम की जमकर तारीफ की।
-और स्कूलों में भी बनवाए जाएंगे ऐसे किचन गार्डन।

बदलेगी मिड-डे मील की सूरत
-सभी सरकारी स्कूलों में बनाया जा सकता है किचन गार्डन।
-बच्चों के खाने में रोज ताजी सब्जियां दी जा सकती हैं।
-इससे बच्चों का स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा।
-सड़ी-गली मिड-डे मील भी बच्चों को नहीं खानी होगी।

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क्या कहती हैं अपूर्वा
मैंने एक गांव को सालभर में कुपोषण से मुक्त करने का फैसला किया है।
-यदि हमारे एक छोटे से कदम से इन बच्चों का भला होता है तो क्यों ना किया जाए।
-ये बच्चे देश की नींव हैं। हमारी कोशिश है कि हम दूसरे स्कूलों में भी ऐसा करें।

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