GST IMPACT: टेलिकॉम सेक्टर के लिए महंगा साबित हुआ GST, पोस्टपेड यूजर्स के लिए बढ़ा दाम

देश में ‘एक देश एक टैक्स’ वाली व्यवस्था गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) लागू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे गुड एंड सिंपल टैक्स बताया है। जीएसटी को देश के इन-

नई दिल्लीः देश में ‘एक देश एक टैक्स’ वाली व्यवस्था गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) लागू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे गुड एंड सिंपल टैक्स बताया है। जीएसटी को देश के इन-डायरेक्ट टैक्स व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा टैक्स सुधार बताया जा रहा है। जीसएटी में सरकार ने अलग-अलग प्रोडक्ट और सेगमेंट में अलग-अलग टैक्स स्लैब रखा है।

टेलीकॉम के लिए जीएसटी पड़ा महंगा
– टेलीकॉम सेक्टर के लिए मंहगा साबित हुआ है। टेलीकॉम सेक्टर को केंद्र सरकार ने 18 परसेंट के टैक्स स्लैब में रखा है, वहीं इससे पहले तक टेलीकॉम पर 15 फीसदी टैक्स लगता था।
– ऐसे में टेलीकॉम सेक्टर के लिए जीएसटी निराशा भरा साबित हो सकता है।
– टेलीकॉम इंडस्ट्री पहले से ही काफी नुकसान को दौर से गुजर रही है ऐसे में सरकार का इसे 18 परसेंट के टैक्स स्लैब में रखना इंडस्ट्री की मुश्किलें बढ़ा सकता है। लिहाजा कंपनियां अपने यूजर्स पर इस बढ़ते टैक्स का भार भी बढ़ाएंगी।

टेलीकॉम इंडस्ट्री में डेटा और कॉलिंग के क्षेत्र में एक नई क्रांति जारी है। रिलायंस जियो के आने के बाद ना सिर्फ रिलायंस जियो बल्कि सभी बड़ी टेलीकॉम कंपनियां अनलिमिटेड कॉलिंग दे रही है इसके साथ ही डेटा की कीमत में भी बड़ी गिरावट देखी जा रही है। ऐसे में ये बढ़ी हुई टैक्स दर इंडस्ट्री के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं।

पोस्डपेड महंगा
पोस्टपेड यूजर्स की बात करें तो उन्हें जीसटी मंहगा पड़ने वाला है। अगर किसी पोस्टपेड यूजर का बिल जीएसटी के पहले 1000 रुपये आता था तो जीसएटी लागू होने के बाद इस बिल में 30 रुपये ज्यादा जुड़ जाएगा और इस तरह आपका बिल 1030 रुपये आएगा।

 

– वहीं प्रीपेड कस्टमर्स को कंपनी कम टॉकटाइम बैलेंस दे कर जीएसटी की दरों से निपट सकती है।

– अनलिमिटेड कॉलिंग के अलावा वोडाफोन, एयरटेल, आइडिया जैसी कंपनियां फ्री एडिशनल डेटा भी दे रही हैं।
– एयरटेल अपने ग्राहकों को 30 जीबी तक फ्री डेटा दे रहा है, वहीं दूसरी ओर वोडाफोन भी अपने रेड पोस्टपेड ग्राहकों को फ्री डेटा देता है।
– ऐसे में 1 जुलाई के बाद टेलीकॉम इंडस्ट्री का रुख देखना दिलचस्प होगा कि आखिर कंपनियां अपने ग्राहकों पर जीएसटी का भार डालेंगी या नहीं।