राम-लखन की जोड़ी हैं पीएम मोदी और सीएम योगीः डाॅ. निर्मल

लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिले प्रचंड बहुमत ने जातिवादी राजनीति को दफन करने का काम किया है। क्योंकि आंबेडकर और लोहिया का नाम आने पर सपा और बसपा ने जाति का तांडव शुरू कर दिया था। आज डाॅ. आंबेडकर और लोहिया की आत्मा सुकून महसूस कर रही होगी।

सीएम योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी की फ़ाइल फोटो

सीएम योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी की फ़ाइल फोटो

लखनऊ: लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिले प्रचंड बहुमत ने जातिवादी राजनीति को दफन करने का काम किया है। क्योंकि आंबेडकर और लोहिया का नाम आने पर सपा और बसपा ने जाति का तांडव शुरू कर दिया था। आज डाॅ. आंबेडकर और लोहिया की आत्मा सुकून महसूस कर रही होगी।

मोदी और योगी की जोड़ी राम-लखन की जोड़ी साबित हुई है। इस जोड़ी ने जातिवादी अहंकार से ग्रस्त रावण को परास्त किया है। भाजपा की इस जीत से दलितों में खुशी की लहर है। ये बातें अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष व राज्यमंत्री (दर्जा प्राप्त) डाॅ0 लालजी प्रसाद निर्मल ने प्रेस कांफ्रेंस में कही है।

डाॅ. निर्मल ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनाव के परिणाम ने जननायक के रूप में स्थापित कर दिया है। आजाद भारत मे पहली बार किसी गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री ने लगातार दूसरी बार बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है।

यह देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आम आदमी के लिए चलाई जा रही जन उपयोगी योजनाओं की वजह से ही संभव हो सका है। दलितों का भरोसा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर बढ़ा है।

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डाॅ. निर्मल ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव मंे यह साबित किया है कि देश में जातिवाद और परिवारवाद का राग अब नहीं चलेगा। देश विकास वाद के रास्ते पर आगे बढ़ चला है। कुछ परिवार देश में राजशाही स्थापित करना चाहते हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव में आम जनता ने उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया है।

यह जनादेश लोकतंत्र में राजतंत्र स्थापित करने वालों के गाल पर तमाचा है। ग्राम स्तर पर विकास, किसानों के बैंक खातेंा में सीधे 2000 रू. की रकम का दिया जाना और पहली बार जमीन पर दिख रही सरकार की योजनाओं ने किसानों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है।

उज्ज्वला गैस योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, फ्री बिजली योजना और शौचालय योजना ने हर घर में सुविधाएं देने का काम किया है। कोई ऐसा गांव नहीं है, जहां इन योजनाओं का लाभ न पहुंचा हो।

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मायावती और अखिलेश यादव ने जातिवादी गठबंधन कर नरेन्द्र मोदी को सत्ता से हटाने की कोशिश की थी, लेकिन इसे जनता ने नकार दिया। यही नहीं, दलितों की देवी होने का राग अलापने वाली मायावती ने गठबंधन की बदौलत प्रधानमंत्री होने का सपना तक देखना शुरू कर दिया था।

मायावती के मंसूबे पर दलितों ने ही पानी फेर दिया है। वह 10 सीट से आगे नहीं बढ़ पाई। यदि मायावती खुद अकेले लोकसभा चुनाव लड़ती तो वह इस बार भी शून्य पर रह जातीं, इस डर से ही मायावती ने अंबेडकर विरोधी पार्टी सपा से गठबंधन कर चुनाव लड़ा। दलित इससे नाराज हो गया और वह भाजपा की ओर शिफ्ट हो गया।

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