विधान परिषद में शिक्षक दल के नेता ने उठाया पैरा मेडिकल स्टाफ की भर्ती का मामला

विधान परिषद् में आज सरकार ने कहा कि प्रदेश में जल्द ही डिप्लोमा स्तरीय पैरा मेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों में से 421 पदों पर जल्द ही चयन किया जायेगा।

लखनऊ : विधान परिषद् में आज सरकार ने कहा कि प्रदेश में जल्द ही डिप्लोमा स्तरीय पैरा मेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों में से 421 पदों पर जल्द ही चयन किया जायेगा।

इसके अलावा सरकार ने यह भी बताया कि मनरेगा योजना के तहत करीब 95 प्रतिशत मनरेगा मजदूरों को आधार कार्ड से जोड़ दिया है।

सरकार की तरफ से दिया गया ये जवाब

प्रश्न प्रहर में शिक्षक दल के सुरेश कुमार त्रिपाठी के एक सवाल के जवाब में सरकार की तरफ से बताया कि गत वर्ष 2018 में डिप्लोमा स्तरीय पैरा मेडिकल के किसी भी पद का विज्ञापन नहीं किया गया है और इस समय 516 पद रिक्त हैं। जिनमें से 421 पदों का अधियाचन उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को भेजा गया है।

जिसमें एक्सरे टेक्नीशिएन के 29 पद, ओटी  टेक्नीशिएन के 127 पद, लैब  टेक्नीशिएन के 192 पद, फार्मासिस्ट के 57 पद, डायटिशियन  के 14 पद और फोटोग्राफर के दो पदों पर आयोग चयन की कार्यवाही करेगा।

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कांग्रेस ने उठाया मनरेगा मजदूरों के भुगतान का मामला

इसके अलावा प्रश्नकाल में ही ग्राम्य विकास राज्य मंत्री, स्वतन्त्र प्रभार, डा. महेन्द्र सिंह ने मनरेगा मजदूरों को दी जानेवाली मजदूरी के  बाबत कांग्रेस के दीपक सिंह द्वारा पूछे गये एक सवाल के जवाब में कहा कि मनरेगा में मजदूरों के भुगतान के लिए पूरी पारदर्शिता व्यवस्था कर दी है।

95 प्रतिशत मजदूरों को आधार कार्ड से जोड़ दिया है। पहले इनकी मजदूरी का भुगतान लम्बित रहता था लेकिन हमारी सरकार ने इनके भुगतान में 85 प्रतिशत तक सुधार कर दिया है।

पहले इसके लिए साढ़े तीन हजार करोड़ रूपये का बजट था। जिससे परफार्मेन्स के आधार पर बढ़ाकर साढ़े सात हजार करोड़ रूपये कर दिया गया है। योजना का शत-प्रतिशत सोशल आडिट हो रहा है।

दीपक सिंह ने कई राज्यों में मजदूरों को मिलने वाली मजदूरी का आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में मात्र 182 रूपये ही मजदूरी दी जा रही है, जबकि अन्य प्रदेशों में 200 रूपये से अधिक दी जा रही है, जैसे कर्नाटक और पंजाब में क्रमशः 249 और 241 रूपये। उन्होंने कहा कि क्या यह मान लिया जाये कि उत्तर प्रदेश सरकार, केन्द्र सरकार से मजदूरी बढ़वाने में असमर्थ है।

इस पर मंत्री ने आंकड़ों के साथ सदन को बताया कि वर्ष 2014 में 120 रूपये मजदूरी दी जाती थी, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर अब 182 रूपये कर दिया गया है।

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